कम जगह और कम समय में आपको बंपर मुनाफा देगी ये हरा सोना,जानें कैसे करें इसकी खेती

कम जगह और कम समय में आपको बंपर मुनाफा देगी ये हरा सोना,जानें कैसे करें इसकी खेती

किसान अक्सर ऐसा फसल की तलाश में रहते हैं जो कम समय में तैयार हो जाए और जिसमें खर्चा भी कम जाए. तो एक फसल ऐसी है जो महज 14-15 में तैयार हो जाती है और इसकी कटाई की जा सकती है.जी हां यह कोई सपना नहीं, बल्कि हकीकत है, असल में पारंपरिक खेती में जहां महीनों लग जाते हैं, तो वहीं खेती की एक ऐसी 'स्मार्ट' तकनीक है जो रॉकेट की रफ्तार से तैयार होकर मुनाफा देती है. इस फसल को शहरों में लोग अपनी बालकनी में उगाकर भी हजारों कमा रहे हैं. तो चलिए, आज हम आपको इसी 'चमत्कारी' खेती के बारे में ही जानते हैं.

माइक्रोग्रीन्स क्या है?

असल में 14 दिन में तैयार होने वाली फसल का असली नाम है माइक्रोग्रीन्स. ये किसी भी सब्जी या पौधे के नन्हे-नन्हे बच्चे होते हैं, जिन्हें बीज से उगने के 7 से 15 दिन बाद ही काट लिया जा सकता है. जब पौधे में पहली दो पत्तियां आती हैं, वही अवस्था माइक्रोग्रीन कहलाती है.मूली, सरसों, चुकंदर, पालक, सूरजमुखी, मटर, धनिया, गेहूं के जवारे (व्हीटग्रास) आदि के माइक्रोग्रीन्स काफी फेमस हैं.वैसे तो मूली और सरसों के माइक्रोग्रीन्स 7 से 10 दिन में ही तैयार हो जाते हैं.

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समझिए मार्केट का खेल

वैसे तो ये छोटे-छोटे पौधे कीमत में बड़े-बड़ों को मात देते हैं. माइक्रोग्रीन्स में नॉर्मल सब्जियों के मुकाबले 40 गुना तक ज्यादा पोषक तत्व भी होते हैं.बड़े-बड़े फाइव स्टार होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और हेल्थ को लेकर जागरूक शहरी लोग के बीच इसकी जबरदस्त डिमांड रहती है.इसको सलाद, सूप और डिश की गार्निशिंग के लिए मुंहमांगी कीमत पर खरीदा जाता है.बाजार में माइक्रोग्रीन्स करीब ₹2000 से ₹4000 प्रति किलोग्राम तक बिकते हैं.

इससे भी तेज: स्प्राउट्स (Sprouts) - 3 से 5 दिन में तैयार

अगर आपको 14 दिन भी ज्यादा लग रहे हैं, तो स्प्राउट्स आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकते हैं. स्प्राउट्स बीज के अंकुरण की पहली अवस्था है, इसे बिना मिट्टी के, केवल पानी और नमी में उगाते हैं.मूंग, चना, मोठ जैसे बीजों को रात भर भिगोकर, पानी निकालकर एक गीले कपड़े में बांधकर रखें  और 2 से 3 दिन में ही ये खाने के लिए तैयार हो जाते हैं. इसकी भी मार्केट में अच्छी डिमांड है.

कैसे करें इसकी खेती की शुरुआत? 

माइक्रोग्रीन्स उगाने के लिए आपको खेत की जरूरत नहीं है.आप एक छोटी प्लास्टिक की ट्रे या कोई भी पुराना डिब्बा लें. फिर इस समें मिट्टी की जगह कोकोपीट (नारियल का बुरादा) भरें,यह हल्का होता है और नमी बनाए रखता है. आप कोकोपीट के ऊपर बीजों को घना-घना फैलाएं और स्प्रे बोतल से हल्का पानी छिड़कें.

जी हां 2-3 दिन ट्रे को अंधेरे में रखने पर जब बीज अंकुरित हो जाएं, तो उसे खिड़की या बालकनी में हल्की धूप में रख देना चाहिए. फिर 7 से 15 दिन में जब पौधे 2-3 इंच के हो जाएं, तो कैंची से काट लें.

कमाई का कैलकुलेशन समझ लेते हैं.

लागत: एक छोटी ट्रे (10x12 इंच) तैयार करने में आपका कुल खर्च (बीज + कोकोपीट) मुश्किल से ₹50 से ₹100 के आसपास आएगी.
पैदावार और कमाई: इसी एक ट्रे से करीब 150-200 ग्राम माइक्रोग्रीन्स निकल सकते हैं,तो अगर आप इसे ₹300 में भी बेचते हैं, तो भी आपको सीधा ₹200 का मुनाफा होता है.
तो फिर सोचिए, अगर आप ऐसी 100 ट्रे अपनी छत पर लगा लें, तो आप हर 15 दिन में ₹20,000 आसानी से कमा सकते हैं.

बेसिक खर्चा और कमाई

ट्रे साइज: 10×12 इंच
एक ट्रे का खर्च (बीज + कोकोपीट): ₹100
एक ट्रे की पैदावार: 150–200 ग्राम
बिक्री कीमत: करीब ₹300 प्रति ट्रे

1- 100 ट्रे से कितनी कमाई?

100 ट्रे × ₹200 = ₹20,000 (हर 15 दिन)
महीने में 2 कटाई = ₹40,000
6 महीने = ₹2,40,000
12 महीने = ₹4,80,000

सिर्फ 100 ट्रे से ही आप साल में 4–5 लाख कमा सकते हैं

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2- महीने का 1 लाख मुनाफा कैसे?

मासिक मुनाफा = ट्रे × ₹200 × 2 कटाई

₹1,00,000 कमाने के लिए:250 ट्रे लगाने होंगे → ₹1,00,000/माह

3- अगर 10% नुकसान हो तो?

तब आपको लगभग 275–280 ट्रे लगाने होंगे.
इसके बाद भी आप आसानी से ₹1 लाख/महीने कमा सकते हैं.

4- प्रीमियम दाम पर ज्यादा मुनाफा

अगर आप रेस्तरां, कैफ़े या डायरेक्ट कस्टमर को बेचें और ₹400/ट्रे का दाम लें, तो मुनाफा बढ़कर ₹300/ट्रे हो जाएगा.तब केवल 160–170 ट्रे से ही ₹1 लाख/माह कमाई हो जा सकती हैय

5-स्केल-अप प्लान

100 ट्रे = ₹40,000/महीने
150 ट्रे = ₹60,000/महीने
200 ट्रे = ₹80,000/महीने
250 ट्रे = ₹1,00,000/महीने

6- सालाना कमाई का कैलकुलेशन

250 ट्रे (₹200/ट्रे मुनाफा): ₹1,00,000/महीने = ₹12,00,000/साल
200 ट्रे (₹300/ट्रे मुनाफा): ₹1,20,000/महीने= ₹14,40,000/साल

यानी कि 100 ट्रे = ₹40,000/महीने
250 ट्रे = ₹1,00,000/महीने
200 ट्रे (बेहतर प्राइस पर) = ₹1.2 लाख/महीने

तो अब आप समझ गए होंगे कि कैसे 2 हफ्ते में भी फसल तैयार कर सकते हैं. असल में माइक्रोग्रीन्स की खेती आज के दौर का एक स्मार्ट और इनोवेटिव बिजनेस आइडिया है,इसके पूरी साल उगाते रहेंगे तो किसान खुद के लिए तगड़ा फंड बना सकते हैं.(नोट: खबर केवल सामान्य जानकारी पर आधारित है, मुनाफे का आंकड़ा बदल सकता है)








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