गरियाबंद : कृषि महाविद्यालय एवं छात्रावास भवन का निर्माण तथा अनुसंधान केंद्र की स्थापना को लेकर गरियाबंद जिले के पोखरा,रक्सा, परसदा जोशी, दुग्धकैया और खपरी ग्रामों के किसानों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम से ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन किसानों ने राजिम अनुविभागीय अधिकारी विशाल महाराणा को सौंपा।ज्ञापन में बताया गया कि 15 वर्ष पहले ही पोखरा ग्राम में कृषि महाविद्यालय के लिए 30 हेक्टेयर भूमि का अनुबंध पास किया गया था।जिसका मसौदा बीज निगम आयोग रायपुर में जमा है। इसके अलावा पोखरा में कृषि फार्म के पास 178 हेक्टेयर कृषि भूमि भी है, जो छात्र-छात्राओं के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकती है। ग्राम पोखरा गरियाबंद जिले के अंतिम छोर पर स्थित है, जो रायपुर और महासमुंद सहित तीन जिलों से जुड़ा है।यहां आवागमन की बेहतर सुविधा है और पास ही महानदी पर निर्मित एनीकेट से पर्याप्त जल स्रोत उपलब्ध है।
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पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और तत्कालीन कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू के कार्यकाल में ही इस महाविद्यालय के लिए पोखरा का चयन किया गया था। इसके बावजूद, हाल ही में जिला प्रशासन ने कृषि महाविद्यालय के लिए फिंगेश्वर के किरवई ग्राम का चयन किया। इस निर्णय के विरोध में 21 और 22 अगस्त को फिंगेश्वर में महाबंद और धरना-प्रदर्शन आयोजित हुआ, जिसमें नगर पूर्णत: बंद रहा। इधर फिंगेश्वर नगर विकास एवं संघर्ष समिति के प्रयासों से विधानसभा में विधायक रोहित साहू द्वारा इस विषय को उठाया गया। फलस्वरूप कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने फिंगेश्वर में कृषि कॉलेज भवन निर्माण के लिए 14 करोड़ 92 लाख 58 हजार रुपए की स्वीकृति दी। इसके बाद प्रशासन ने तहसीलदार फिंगेश्वर को भूमि चिन्हित करने के निर्देश दिए और 22 व 34 एकड़ सहित कुछ अन्य शासकीय भूमि का चिन्हांकन कर जिला कार्यालय को भेजा गया।लेकिन कृषि विभाग की रिपोर्ट में इन प्लाटों को अनुपयुक्त बताते ही फिंगेश्वर में हलचल मच गई।
संघर्ष समिति के सदस्य जिलाधीश एवं कृषि महाविद्यालय के कुलपति से मिले, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका।इस बीच पूर्व भाजपा किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष संजीव चंद्राकर ने स्पष्ट किया कि कृषि महाविद्यालय के लिए पोखरा ही सर्वाधिक उपयुक्त स्थान है। यहां पूर्व से भूमि चयनित है, अनुसंधान केंद्र के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं और जल आपूर्ति की भी कोई कमी नहीं है। वही कृषि फार्म पोखरा के तत्कालीन प्रबंधक अनूप चतुर्वेदी से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा गरियाबंद सहित अन्य जिलों में कृषि महाविद्यालय के लिए आदेश जारी किए गए थे। इसी अनुक्रम में गरियाबंद जिले के पोखरा स्थित भूमि को कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र के लिए आवंटित किया गया था। इससे संबंधित समस्त दस्तावेज पोखरा कृषि फार्म एवं रायपुर बीज निगम में जमा है।
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