रायगढ़ : शासन ने बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए रोड किनारे करीब तीन एकड़ जमीन स्कूल के लिए आरक्षित की थी। भूमाफियाओं ने उसको भी बेच दिया। अब यहां एक एकड़ जमीन भी सुरक्षित नहीं बची। सामने के छोटे झाड़ के जंगल के रूप में दर्ज भूमि पर भी अतिक्रमण किया जा चुका है।विजयपुर में राजस्व विभाग की नाकामी और बेबसी पर भूमाफिया भारी पड़े हैं। सरकारी रोड किनारे की बेशकीमती सरकारी जमीनों को बचाने में भी नाकामी साबित हुई है। सरकारी आवंटन भूमि को टुकड़ों में बेचने वाले गिरोह में हर तरह के लोग शामिल हैं। नेता, जनप्रतिनिधि, राजस्व कर्मचारी और बाहुबलियों का गठजोड़ विजयपुर में तबाही मचा रहा है।
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सब कुछ जाानकर भी प्रशासन इसलिए सख्त कार्रवाई नहीं कर पाता क्योंकि इच्छाशक्ति नहीं है। सरकारी आवंटन भूमि 4/6 को सात टुकड़ों में बेचा जा चुका था जिसमें नामांतरण निरस्त कर भूमि मूल आवंटी के नाम की गई है। अब मामला खसरा नंबर 8 रकबा 1.214 हे. का है। यह भूमि पूर्व में स्कूल के लिए आरक्षित की गई थी। राजस्व अभिलेखों में भी यह दर्ज है। रोड किनारे खनं 4/1 के पीछे ही यह तीन एकड़ जमीन स्थित है। यहां स्कूल तो नहीं बना लेकिन लोगों ने मकान-दुकान बना लिए हैं। दो गलियों में कई मकान बन चुके हैं। कई ने खाली जमीन पर भी कब्जा कर लिया है। पानी टंकी के इर्द-गिर्द पूरी जमीन पर अतिक्रमण हो चुका है। बड़ी ही आसानी से यह जमीन लोगों को बेच दी गई। अब यहां जमीन ही नहीं बची है।
इस क्षेत्र की सभी आवंटन जमीनों पर एक गिरोह नजर गड़ाकर बैठा है। इसमें हर पार्टी, हर तरह के लोग हैं। शासन-प्रशासन से निपटने के लिए भी इनके पास प्लान है। ग्रुप का पहला काम पटवारी से सांठगांठ कर जमीन विक्रय कराना होता है। जल्द से जल्द नामांतरण भी करवा लेते हैं। तहसीलदार को भी पता नहीं चलता कि जिस जमीन का नामांतरण वह कर रहा है, वह सरकारी आवंटन भूमि है। इसी तरह सरकारी भूमि पर प्लॉट काटकर अतिक्रमण करवाया जाता है।
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खनं 4/6 में सात टुकड़ों में हुई रजिस्ट्री के नामांतरण निरस्त किए जा चुके हैं। इसमें एक टुकड़े का खरीदार पूर्व पार्षद और वर्तमान पार्षद पति पदुम लाल परजा भी है। उसने खनं 4/26 रकबा 0.0190 हे. खरीदा था। सरकारी जमीनों की खरीद-बिक्री लंबे समय से जारी है। खनं 4/1 रकबा 2.051 हे. भी शासकीय भूमि है जो छोटे झाड़ के जंगल के रूप में दर्ज है। यह सडक़ से लगकर है। यह भूमि भी अब दिखाई नहीं देती क्योंकि रोड किनारे से लेकर अंदर तक पूरी जमीन पर अतिक्रमण हो चुका है। अभी एक साथ चार दुकानों का भी निर्माण हो रहा है।

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