सीजीपीएससी भर्ती घोटाला :  पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में ऐसे हुआ CGPSC घोटाले का पूरा खेल

सीजीपीएससी भर्ती घोटाला : पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में ऐसे हुआ CGPSC घोटाले का पूरा खेल

रायपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) के भर्ती घोटाला में अफसरों ने भ्रष्टाचार करने को सारी हदें पार कर दीं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के सूत्रों के अनुसार सीजीपीएससी के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव, पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर सभी ने मिलकर भर्ती घोटाले को अंजाम दिया।

नियम बदले, पर्चा लीक कराया और अपनों तथा कुछ नेताओं के रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर से लेकर अन्य पदों पर भर्ती कराया। सीबीआई ने दावा किया है कि सोनवानी ने अपने दो भतीजों के लिए न केवल दिशा-निर्देशों में फेरबदल किया, बल्कि उन्हें सीजीपीएससी-2021 परीक्षा के प्रश्नपत्र भी पहले ही दे दिए थे, जिससे उनके चयन में आसानी हुई।

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सीबीआई ने 16 जनवरी 2025 को रायपुर की एक विशेष अदालत में पहला आरोप पत्र दायर किया है। इसमें पूर्व अध्यक्ष सोनवानी और छह अन्य लोगों का नाम शामिल है, जिनमें उनके भतीजे नितेश सोनवानी और साहिल सोनवानी; सीजीपीएससी के तत्कालीन उप नियंत्रक परीक्षा ललित गणवीर; श्री बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के निदेशक श्रवण कुमार गोयल, उनके बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार शामिल हैं।

पहले नियम बदलें

सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार 14 जुलाई 2021 को एक बैठक में टामन सिंह सोनवानी ने परीक्षा के दिशा-निर्देशों में बदलाव किया। उन्होंने 'रिश्तेदार' शब्द को 'परिवार' से बदल दिया और 'भतीजे' को परिभाषा से बाहर कर दिया, ताकि उनके भतीजों को फायदा मिल सके जो सीजीपीएससी 2021 की परीक्षा देने वाले थे। नियमों के मुताबिक यदि किसी अध्यक्ष या सदस्य का कोई करीबी रिश्तेदार परीक्षा देता है, तो उन्हें चयन प्रक्रिया से खुद को दूर रखना होता है।

पर्चा लीक कराने में आरती की भी रही भूमिका

चार्जशीट में कहा गया है कि तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक ने मेसर्स एकेडी प्रिंटर्स प्राइवेट लिमिटेड के अरुण द्विवेदी को प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने का ठेका दिया था। आरोप है कि एकेडी प्रिंटर्स ने प्रश्नपत्रों के अंतिम मसौदे तैयार कर सीलबंद लिफाफे में वासनिक के पास भेजे। सीबीआई के मुताबिक जनवरी 2022 में यह लिफाफा वासनिक के घर से लिया गया, जहां सोनवानी भी मौजूद थे। इसके बाद प्रश्नपत्रों को सोनवानी और वासनिक के परामर्श से अनुमोदित किया गया और बाद में 13 फरवरी 2022 को निर्धारित परीक्षा में उन्हीं प्रश्नों को पूछा गया। मुख्य परीक्षा के लिए भी इसी तरह की हेराफेरी की गई थी।

रिश्वत का भी हो चुका है खुलासा

सीबीआई ने चार्जशीट में एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) ग्रामीण विकास समिति (जीवीएस) का जिक्र किया है, जिस पर पूर्व अध्यक्ष सोनवानी के परिवार का नियंत्रण है। आरोप है कि प्रश्नपत्रों के बदले में गोयल की कंपनी से एनजीओ को 45 लाख रुपये की रिश्वत ली गई। जीवीएस ने बजरंग पावर एंड इस्पात से अपने कला महाविद्यालय के निर्माण के लिए 50 लाख रुपये मांगे थे।

गोयल ने, जो फर्म की सीएसआर समिति के सदस्य थे, जीवीएस को दो किस्तों में 20 लाख और 25 लाख रुपये की राशि स्वीकृत करने की सिफारिश की। यह पैसा मार्च और मई 2022 को एनजीओ के बैंक खाते में ट्रांसफर किया गया। सीबीआई ने दावा किया है कि गोयल को पता था कि यह राशि कंपनी अधिनियम 2013 के तहत सीएसआर के रूप में नहीं दी जा सकती।

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2019 की सहायक प्राध्यापक भर्ती की परीक्षा भी संदिग्ध

सीबीआई के मुताबिक आरोपितों में कुछ आरोपों से संबंधित जांच अभी भी लंबित है, जिसमें अन्य उम्मीदवारों के चयन और 2019 की सहायक प्राध्यापक भर्ती में कथित गड़बड़ी से जुड़े आरोप शामिल हैं। चार्जशीट में बताया गया है कि किस तरह पीएससी के तत्कालीन पदाधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग किया। आरोप है कि उन्होंने पैसे लेकर अपने रिश्तेदारों और करीबी लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए पेपर लीक किए। बतादें कि पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर ने 18 चयनित अभ्यर्थियों का नाम देते हुए भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर हाई कोर्ट बिलासपुर में याचिका लगाई थी। इसके बाद कोर्ट ने इस याचिका के तहत उन अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर रोक लगा दी थी।

टामन सिंह सोनवानी के रिश्तेदार

आरोप है कि पूर्व पीएससी अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के पांच रिश्तेदारों की नियुक्ति की गई। इनमें उनके करीबी रिश्तेदार नितेश सोनवानी (डिप्टी कलेक्टर), बहू निशा कोसले (डिप्टी कलेक्टर), भाई के बेटे साहिल सोनवानी (डीएसपी), भाई की बहू दीपा अजगले आदिल (जिला आबकारी अधिकारी) और बहन की बेटी सुनीता जोशी (श्रम अधिकारी) शामिल हैं। आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों के सरनेम छिपाए गए थे।

अन्य अधिकारियों के रिश्तेदार

आयोग के सचिव व सेवानिवृत्त आइएएस जीवन किशोर ध्रुव के रिश्तेदार सुमित ध्रुव का चयन भी डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ था। इसी तरह, पीएससी के सहायक नियंत्रक ललित गनवीर की बहू के चयन पर भी सवाल उठाए गए थे। सुमित ध्रुव काे सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है।

प्रभावशाली परिवारों से चयन

आरोप पत्र में राज्यपाल के पूर्व सचिव अमृत खलको के बेटे निखिल खलको और बेटी नेहा खलको (दोनों डिप्टी कलेक्टर) का नाम भी शामिल है। इसके अलावा, कांग्रेस नेता सुधीर कटियार के दामाद शशांक गोयल (रैंक 3) और बेटी भूमिका कटियार (रैंक 4) के चयन को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। शशांक और भूमिका दोनों ही अभी जेल में हैं। परीक्षा में प्रज्ञा नायक (रैंक 1) और उनके भाई प्रखर नायक (रैंक 20) के चयन ने भी सबको चौंका दिया था। आरोप पत्र में इनका संबंध एक कांग्रेस नेता के ओएसडी से बताया गया है।

अन्य नेताओं व अधिकारियों के स्वजन

आरोप पत्र में डीआइजी ध्रुव की बेटी साक्षी ध्रुव, कांग्रेस नेताओं के ओएसडी के रिश्तेदारों खुशबू बिजौरा, स्वर्णिम शुक्ला और अनन्या अग्रवाल के नाम भी शामिल हैं, जिनका चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ है।










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