बेहद कम समय में अच्छा मुनाफा देगी मूली की इन किस्मों की खेती,जानिए कैसे करें खेती

बेहद कम समय में अच्छा मुनाफा देगी मूली की इन किस्मों की खेती,जानिए कैसे करें खेती

मूली एक ऐसी फसल है, जो बेहद कम समय में तैयार होकर अच्छा मुनाफा देती है. सितंबर माह में किसान मूली की उन्नत प्रजातियां पूसा हिमानी, पूसा रश्मि, पंजाब पसंद की खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

खाने में आमतौर पर सलाद के रूप में मूली का प्रयोग खूब किया जाता है. मूली हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होती है. इसकी खेती कंद सब्जी के रूप में की जाती है यह एक ऐसी फसल है, जो बेहद कम लागत में तैयार होकर अच्छा मुनाफा देती है. मूली की खेती करने वाले किसान मूली की उन्नत प्रजातियों में शामिल पूसा रश्मि की खेती सितंबर माह में करें. जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिलेगा. यह एक ऐसी प्रजाति है, जो बुवाई के 55 से 60 दिन में तैयार हो जाती है. इसकी एक खासियत यह भी है कि इसकी जड़ें 30 से 35 सेमी. तक लंबी होती हैं. मूली की यह प्रजाति प्रति हेक्टेयर 320 से 350 क्विंटल तक का उत्पादन देती है.

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मूली की उन्नत प्रजातियों में पंजाब पसंद मूली की प्रजाति भी अपना अलग स्थान रखती है. यह एक ऐसी प्रजाति है, जो बुवाई के 45 दिन बाद तैयार हो जाती है. इसकी खासियत है कि यह रेशा रहित मूली होती है. इसकी जड़ें भी खूब लंबी होती हैं. प्रति हेक्टेयर कि दर से इस प्रजाति की मूली 230 से 235 क्विंटल तक का उत्पादन देती है. सितंबर माह में किसान पंजाब पसंद मूली की बुवाई करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

पूसा हिमानी प्रजाति की मूली स्वाद में हल्की तीखी होती है. यह भी मूली की उन्नत प्रजातियों में शामिल है. इसकी खासियत यह है कि यह 25 से 30 सेमी तक लंबी होती है, जो बुवाई के 60 दिन के अंतराल पर तैयार हो जाती है. उन्नत प्रजाति की मूली मानी जाती है, जो प्रति हेक्टेयर की दर से 330 से 350 क्विंटल तक का उत्पादन देती है.

रैपिड रेड व्हाइट मूली देखने में बिल्कुल लाल रंग की गाजर की तरह होती है. परंतु इसका छिलका लाल और अंदर सफेद होती है .यह मूली खाने में बेहद स्वादिष्ट होती है. इसकी खासियत यह है कि यह सबसे कम समय में तैयार हो जाती है. वहीं मूली की खेती करने वाले किसान इस खास प्रजाति की मूली की बुवाई सितंबर माह में कर दें, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिलेगा.

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सितंबर माह में मूली की खेती करने वाले किसानों के लिए जापानी सफेद प्रजाति की मूली बेहद खास है, क्योंकि यह एक ऐसी प्रजाति की मूली है, जो बुवाई के 45 से 50 दिनों में तैयार हो जाती है. इसका स्वाद हल्का तीखा एवं दिखने में बेलनाकार होने के साथ ही बेहद मुलायम होती है. यह प्रजाति प्रति हेक्टेयर की दर से 250 से 300 क्विंटल तक का उत्पादन देती है.

मूली की खेती के लिए हल्की, भुरभुरी, और अच्छी जल निकासी वाली बलुई-दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है, जिसमें जैविक पदार्थ की भरपूर मात्रा हो. मिट्टी का pH मान 6.0 से 7.0 के बीच होना चाहिए, क्योंकि इस रेंज में जड़ों का विकास अच्छे से हो सके










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