गरियाबंद में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी : प्रशासन के लिये दोहरी चुनौती

गरियाबंद में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी : प्रशासन के लिये दोहरी चुनौती

गरियाबंद: जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का शुरुआत तो की गई है किंतु तीन दिन बाद भी बहुत से उपार्जन केंद्रों में खरीदी का काम सुचारू रूप से नही हो पा रहा है। । जिले के दूरस्थ क्षेत्रों के उपार्जन केंद्रों में 17 तारीख तक खरीदी कार्य प्रारम्भ नही हो सका है।

इधर जिले के कलेक्टर बी.एस.उइके ने कहा कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शासन की महत्वपूर्ण प्राथमिकता में है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही अथवा अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जायेगी । उन्होंने कहा कि किसानो की धान खरीदी को राज्य शासन ने अत्यावश्यक सेवा अधिनियम एस्मा के तहत शामिल किया है, अतः धान खरीदी में संलग्न कर्मचारी की अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए एफआईआर की कार्रवाई की जायेगी ।इसके साथ ही किसानों को एग्रिस्टेक पंजीयन में परेशानी हो रही है। ऐसे किसान जिनकी दो गांव में जमीन है, उनका एग्रिस्टेक पंजीयन एक ही गांव का दिखा रहा है।

ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी - लाली मेरे लाल की,जित देखूँ तित लाल....

एक तरफ समिति प्रबंधकों और कम्प्यूटर ऑपरेटर की हड़ताल ने खरीदी को प्रभावित किया हुआ है, वही दूसरी तरफ ओडिशा सीमा से लगे देवभोग और मैनपुर विकासखंडों में अवैध धान का परिवहन और भंडारण या साफ शब्दों में कहे कि धान की तस्करी चरम पर है।

वैसे शासन स्तर पर धान खरीदी 15 नवंबर से प्रारंभ की गई, किन्तु मिली जानकारी के अनुसार मैनपुर और देवभोग ब्लॉक के कुछ बिचौलियों दीवाली के पहले से ही ओडिसा से धान लाकर अवैध भंडारण में लगे हुये थे, प्रशासनिक स्तर पर कुछ कार्यवाहियां भी कभी कभार की जाती है, किन्तु लगता है कि ये कार्यवाही केवल खानापूर्ति ही होती है,
इससे धान का अवैध व्यापार या तस्करी नही रुक रही है।पिछले दिनों मैनपुर एसडीएम तुलसीदास मरकाम ने ग्राम धनोरा में ऐसे ही अवैध भंडारण पर कार्यवाही की थी। गरियाबंद जिले में धान तस्करी का खेल इससे होने वाले तगड़े मुनाफे की वजह से किया जाता है।

इसका मुख्य कारण धान का समर्थन मूल्य और प्रति एकड़ 3100 रु मिलने वाली कृषि आदान राशि है। एक कारण ये भी है कि छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदा जाता है, किन्तु मैनपुर और देवभोग ब्लॉक में धान की उपज प्रति एकड़ औसत 12 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ है।

इन दोनों ब्लॉक में धान के अतिरिक्त मक्के का भी उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। इसीलिये प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की पूर्ति के लिये ओडिसा का धान कम मूल्य पर यहां लाया जाता है चूंकि ओडिसा में धान का उत्पादन अधिक है।







You can share this post!


Click the button below to join us / हमसे जुड़ने के लिए नीचें दिए लिंक को क्लीक करे


Related News



Comments

  • No Comments...

Leave Comments