बलरामपुर : मरम्मत के नाम पर सिर्फ मजाक, एनएच 343 पर धूल के गुब्बारे और जनता की टूटती उम्मीदें

बलरामपुर : मरम्मत के नाम पर सिर्फ मजाक, एनएच 343 पर धूल के गुब्बारे और जनता की टूटती उम्मीदें

बलरामपुर : छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के बलरामपुर-रामानुजगंज से अंबिकापुर तक जाने वाली एनएच-343 की हालत आज ऐसी हो चुकी है कि यहां सड़क नहीं, धूल का मैदान नजर आता है।

करोड़ों की स्वीकृति के बाद भी सड़क की मरम्मत का नतीजा यह है कि गड्ढ़ों और उड़ती धूल के बादल ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। सड़क किनारे रहने वाले परिवारों के घरों में धूल इस तरह घुस रही है कि खाना, पानी, बिस्तर कुछ भी साफ-सुथरा नहीं बच पा रहा। यह धूल आवागमन प्रभावित तो कर ही रहा है साथ ही इससे लोगों की सेहत पर भी गंभीर खतरा बनकर बैठी है।

रामानुजगंज से अंबिकापुर तक एनएच-343 की मरम्मत के लिए 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। कुछ जगह पेचिंग वर्क हुआ भी, लेकिन भारी वाहनों के आवागमन ने चंद दिनों में ही इस मरम्मत की पोल खोल दी। सड़क फिर पुराने हाल में लौट आई। गहरे गड्ढ़ों के साथ उड़ती धूल के गुब्बारे। स्थानीय लोगों का कहना है कि, सड़क की मरम्मत से अधिक यहां धूल उछाल प्रतियोगिता के लिए जमीन तैयार कर दी गई है। सड़क पर खड़े होते ही ऐसा दृश्य बनता है जैसे धुंध गिर रही हो और विजिबिलिटी खत्म हो जाती है।

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रोड से गुजरने वाले वाहन चालकों की परेशानी भी कम नहीं। ट्रक चालक श्याम सुंदर साह बताते हैं कि, बड़े-बड़े गड्ढों के कारण गाड़ियों को भारी नुकसान होता है। धूल इतनी उड़ती है कि सामने कुछ दिखाई ही नहीं देता। कई बार गाड़ी का पट्टा टूट जाता है और रोज़ सफर करना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। उनका कहना है कि इस सड़क का ठीक होना सिर्फ जरूरत नहीं, मजबूरी है।

सबसे गंभीर स्थिति सड़क किनारे रहने वाले लोगों की है। रामानुजगंज के पावर हाउस के पास रहने वाली कमला देवी बताती हैं कि, उनके घर का हर कोना धूल से पटा रहता है। धूल किचन तक घुस आती है और बर्तनों से लेकर पीने के पानी तक सबको दूषित कर देती है। घर के सदस्य लगातार खांसी और सांस संबंधी समस्याओं से परेशान हैं। कमला देवी का साफ कहना है कि अब उनकी आखिरी उम्मीद सरकार से ही है, वरना जीवन ऐसे ही धूल में घुटता रहेगा।

लोगों में इस बात को लेकर भी भारी नाराजगी है कि सरगुजा संभाग ने भाजपा सरकार को पांच मंत्री और एक मुख्यमंत्री तक दिया, फिर भी यहां की सड़कें इतनी बदहाल हैं। स्थानीय लोगों का तंज है कि जब सरकार एक सड़क तक नहीं बनवा पा रही, तो विकास की बात करना सिर्फ खोखला दावा है। जनता के भरोसे को चोट पहुंचाने वाली यह सड़क आज पूरा सच खुद ब खुद बयां कर रही है।

इधर, धूल से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं पर सौ बिस्तर अस्पताल की डॉक्टर दिव्या पांडेय ने चेतावनी दी है कि, लंबे समय तक धूल में एक्सपोजर रहने से फेफड़ों को स्थायी नुकसान हो सकता है। धूल फेफड़ों में जमा होकर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है, जो आजीवन परेशानियां खड़ी कर सकती हैं।

कुल मिलाकर, एनएच-343 अब सड़क नहीं, व्यवस्था की लापरवाही का आईना बन चुकी है। करोड़ों खर्च होने के बाद भी सड़क की यह दुर्दशा प्रशासन की कार्यशैली पर सीधा सवाल खड़ा करती है। जरूरत सिर्फ मरम्मत की नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों को निभाने की है, ताकि लोग धूल निगलने और जिंदगी को जोखिम में डालने से बच सकें।










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