भाटापारा : - स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय (अंग्रेजी माध्यम) बलौदाबाजार-भाटापारा में संविदा भर्ती को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भर्ती प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताओं, नियम विरुद्ध चयन, अंक हेरफेर और कथित रूप से करोड़ों रुपये के लेन-देन के आरोप सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार, 13 सितंबर 2023 को जिला शिक्षा विभाग ने "वॉक-इन इंटरव्यू" के माध्यम से विभिन्न पदों पर भर्ती हेतु विज्ञापन जारी किया था तथा 6 अक्टूबर 2023 को प्राविण्य सूची प्रकाशित की गई। इसके बाद बड़ी संख्या में शिकायतें जिला चयन समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर को प्राप्त हुईं।
तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन :
शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग रायपुर ने जिला स्तरीय तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। समिति की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार— सहायक शिक्षक पद के लिए विज्ञापन में केवल डीएड / डीएलएड (D.Ed./D.L.Ed.) योग्यता मान्य थी, फिर भी कथित रूप से भारी रकम लेकर बीएड ( B.Ed.) अभ्यर्थियों को भी योग्य माना गया, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।
साक्षात्कार में कुछ अभ्यर्थियों को 20 में 22 व 23 अंक दे दिए गए, जो नियमों के विरुद्ध है।
व्याख्याता पद हेतु निर्धारित अर्हताएं नजरअंदाज की गईं। संस्कृत व्याख्याता के लिए 12वीं व स्नातक में विषय होना अनिवार्य था, लेकिन चयन केवल स्नातकोत्तर में संस्कृत वालों का किया गया।
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प्राविण्य सूची में काट-छांट, चयन सूची जारी ही नहीं :
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि प्राविण्य सूची में कई स्थानों पर हस्तक्षेप, काट-छांट व ओवरराइटिंग पाई गई। आरोप है कि जिन अभ्यर्थियों ने ‘राशि’ दी, उन्हें एक ही दिन बुलाकर नियुक्ति पत्र दे दिए गए, जबकि जिनसे कथित भुगतान नहीं हुआ, उनके नियुक्ति पत्र रोक दिए गए। अंततः काट-छांट वाली प्राविण्य सूची तो प्रकाशित की गई लेकिन अंतिम चयन सूची जारी ही नहीं की गई, जिससे संदेह और गहरा हो गया।
तत्कालीन डीईओ (DEO ) राकेश शर्मा दोषी, कार्रवाई लंबित :
जांच समिति ने तत्कालीन प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी राकेश शर्मा को गंभीर अनियमितताओं के लिए दोषी पाया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच समाप्त होने के बावजूद विभाग ने अभी तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की है और संबंधित अधिकारी द्वारा जांच फाइल को दबा कर रखा गया है।
उल्लेखनीय है कि राकेश शर्मा को पहले भी सेवानिवृत्त अधिकारियों के पेंशन प्रकरणों में देरी के कारण शासन द्वारा निलंबित किया जा चुका है।
'भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टॉलरेंस'—फिर क्यों कार्रवाई नहीं ?
सेवानिवृत्त व्याख्याता व शिकायतकर्ता आर. सोमेश्वर राव ने प्रेसवार्ता के माध्यम से कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है, फिर भी इतने गंभीर आरोपों के बावजूद कार्रवाई न होना सवाल खड़े करता है।उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन से मांग की है कि दोषी अधिकारी राकेश शर्मा को तत्काल पद से बर्खास्त किया जाए और पूरी भर्ती प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
वर्जन :
प्रकरण अभी लंबित है ,यदि दोष सिद्ध होता है तो उचित कार्यवाही होना चाहिए ..
संजय गुहे ,जिला शिक्षा अधिकारी बलौदा बाजार भाटापारा



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