एशेज सीरीज में हुआ था एल्युमिनियम बैट विवाद ICC को बदला पड़ा नियम

एशेज सीरीज में हुआ था एल्युमिनियम बैट विवाद ICC को बदला पड़ा नियम

नई दिल्ली : बात साल 15 दिसंबर, 1979-80 की है जब एशेज सीरीज का मैच खेला जा रहा था। पर्थ के डब्ल्यूएसीए मैदान में हो रहा ये मैच ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच था। ऑस्ट्रेलिया का स्कोर आठ विकेट पर 219 था और मैदान में मौजूद डेनिस लिली ने आयन बॉथम की एक गेंद को एक्स्ट्रा कवर की तरफ खेला।

गेंद खेल कर वो तुरंत तीन रन लेने के लिए दौड़ पड़े, लेकिन इस बीच सबका ध्यान गया एक आवाज की तरफ गया। ये उनके बल्ले से निकली आवाज थी। यही वो विवादित बल्ला बना जिसके कारण बाद में क्रिकेट में खेल के नियम बदलने पड़ गए।

आवाज ने फैदा किया विवाद

डेनिस लिली के हाथ में जो बल्ला था वो अन्य खिलाड़ियों के बल्ले की तरह लकड़ी का नहीं बना था, बल्कि एल्युमिनियम का बना था। यही कारण था कि गेंद के बल्ले से लगने के बाद मैदान में एक आवाज गूंजी थी, जिस सुन क्रिकेट फैंस और इंग्लैंड के खिलाड़ी चकित रह गए थे।

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इस मैच से बारह दिन पहले लिली ने वेस्टइंडीज के खिलाफ एक मैच में इसी बल्ले का इस्तेमाल किया था। इस मैच में भी डेनिस लिली वही बैट लेकर बल्लेबाजी करने आए। यहां एक बात जाननी जरूरी है कि उस वक्त बैट को लेकर कोई नियम नहीं था। बल्लेबाज किसी भी तरह के बल्ले का इस्तेमाल कर सकता था।

शिकायत के बाद बदलना पड़ा बल्ला

खैर, गेंद के खराब होने को लेकर इंग्लैंड के कप्तान माइक ब्रेयरली ने शिकायत की और अंपायरों ने उन्हें पारंपरिक लकड़ी के बल्ले से खेलने के लिए मजबूर किया। इंग्लैंड के कप्तान माइक ब्रेयरली ने यह तर्क देते हुए विरोध किया कि बैट का मटेरियल गेंद को नुकसान पहुंचा रहा है।

ICC ने बदला नियम

अंपायरों और ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ग्रेग चैपल के हस्तक्षेप के बाद गुस्से में आए लिली को आखिरकार लकड़ी के बल्ले से खेलने के लिए मना लिया गया। इस कहानी को एशेज के सबसे अजीब विवादों में से एक माना जाता है। इस घटना ने आईसीसी को क्रिकेट में बल्ले लेकर नए नियम बनाने को मजबूर कर दिया। उसके बाद नियम आया कि बल्लेबाज लकड़े की बल्ले का इस्तेमाल कर सकता है।









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