बिलासपुर : शहर के विस्तार और बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए शासन ने लगरा स्थित 15 एकड़ सरकारी भूमि को ई-ट्रैकिंग पार्क के निर्माण के लिए विधिवत यातायात विभाग को आवंटित कर दिया है। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए शासन ने 28 नवंबर 2025 को राजस्व अधिकारियों को स्पष्ट आदेश जारी करते हुए 1 दिसंबर 2025 को दोपहर 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच सीमांकन करने का निर्देश जारी किया है।
यह वही जमीन है जिस पर स्थानीय किसानों ने वर्षों से खेती करके कब्जा जमा रखा था, जबकि राजस्व अभिलेखों में इस पूरी भूमि को शासकीय बताया गया है। तीन महीने पहले जिला प्रशासन ने कब्जाधारियों को जमीन खाली करने का निर्देश दिया था, लेकिन किसी ने अवैध कब्जा छोड़ा। शासन अब इस गैरकानूनी कब्जे पर निर्णायक प्रहार करने की तैयारी कर चुका है।
दलालों की सक्रियता बढ़ी, शासन ने तल्खी दिखाई
सूत्रों के अनुसार, लगरा क्षेत्र में कुछ दलाल पिछले कुछ सप्ताहों से सक्रिय थे और किसानों को भ्रमित कर जमीन को निजी बताने का खेल खेल रहे थे। प्रशासन को संदेह है कि कब्जा बनाए रखने और सरकारी जमीन को बचाने के नाम पर इन दलालों ने किसानों को उकसाया, जिससे जमीन खाली कराने की प्रक्रिया धीमी हो गई।
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शासन ने इस स्थिति को “गंभीर हस्तक्षेप” मानते हुए कड़ा रुख अपनाया है। आदेश में साफ लिखा है कि सीमांकन के दौरान यदि कोई बाहरी व्यक्ति, दलाल या कब्जाधारी बाधा उत्पन्न करता है तो उसके खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन इस बार किसी भी प्रकार की सौदेबाजी या बहानेबाजी के मूड में नहीं है।
अवैध खेती की वर्षों पुरानी कहानी—अब खत्म होगी
लगरा क्षेत्र के कई किसान वर्षों से इस भूमि पर धान समेत कई प्रकार की फसलों की खेती करते आ रहे हैं । लगातार उपयोग के कारण किसानों ने इसे अपनी निजी भूमि जैसा मान लिया था, जबकि रिकॉर्ड में यह पूरी जमीन शासन की है। न लीज, न पट्टा, न कोई अधिकार—इसके बावजूद खेती जारी रही और फसलें काटी जाती रहीं।
शासन के 28 नवंबर के आदेश के बाद अब 1 दिसंबर का सीमांकन इस अवैध उपयोग पर अंतिम रेखा खींचने वाला दिन माना जा रहा है। सीमांकन के बाद कब्जाधारियों को हटाया जाएगा और जमीन प्रशासनिक अभिरक्षा में ली जाएगी।
ई-ट्रैकिंग पार्क से बदलेगी क्षेत्र की तस्वीर
ई-ट्रैकिंग पार्क के निर्माण के बाद लगरा इलाके में ट्रैफिक मैनेजमेंट, वाहन प्रशिक्षण और आधुनिक यातायात सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ने वाली है। यह परियोजना शहर के बढ़ते यातायात दबाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
जिला प्रशासन का कहना है कि यह जमीन अब पूरी तरह सार्वजनिक उपयोग में लाई जाएगी और शासन की परियोजनाओं में बाधा डालने वाली किसी भी निजी दावेदारी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



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