नई दिल्ली : अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के हस्ताक्षर से जारी करीब 92 प्रतिशत दस्तावेज रद कर दिए गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस आशय की जानकारी देते हुए कहा, 'स्लीपी (निद्राग्रस्त) जो बाइडन की ओर से आटोपेन के हस्ताक्षरों से जारी दस्तावेज रद कर दिए गए हैं। उन दस्तावेजों में दिए आदेश अब अस्तित्व में नहीं हैं।'
ट्रंप ने दावा किया कि बाइडन ने राष्ट्रपति के रूप में जितने भी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए उनमें से ज्यादातर आटोपेन मशीन से किए गए। यह मशीन उन लोगों के द्वारा इस्तेमाल होती है जिन्हें प्रतिदिन बहुत सारे कागजों पर हस्ताक्षर करने होते हैं या वे शारीरिक रूप से अशक्त होते हैं या जो बहुत से लोगों को आटोग्राफ देते हैं।
ट्रंप ने बाइडन हस्ताक्षरित दस्तावेज के रद होने की सूचना अपने इंटरनेट मीडिया पोस्ट में दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि कई लोग आटोपेन का अवैध रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं। सरकारी कामकाज में इसका गलत फायदा उठाया जा सकता है। राष्ट्रपति ने कहा, अगर स्टाफ ने बाइडन के निर्देश पर इस तरह से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए होंगे तो पूर्व राष्ट्रपति पर मुकदमा चलाया जा सकता है।
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बाइडन को कुटिल बताते हुए ट्रंप ने कहा कि जो लोग सरकारी कामकाज में आटोपेन का इस्तेमाल करते हैं वह वास्तव में गैरकानूनी कार्य करते हैं। जो बाइडन अगर इस तरह से हस्ताक्षर करने की प्रक्रिया में शामिल नहीं थे तो वह गैरकानूनी कृत्य था और अगर बाइडन शामिल थे तो उन्होंने गैरकानूनी कार्य किया है।
ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि बाइडन कार्य करने में अक्षम थे। उनकी आयु और मानसिक स्थिति उनका साथ नहीं दे रही थी। इसी वजह से महत्वपूर्ण सरकारी कागजों पर आटोपेन से हस्ताक्षर किए जा रहे थे। इससे यह भी साबित होता है कि उनका राष्ट्रपति पद पर पूर्ण नियंत्रण नहीं था। बहुत से निर्णय उनकी गैरजानकारी में लिए जा रहे थे और आटोपेन से हस्ताक्षरित कार्यकारी आदेश जारी किए जा रहे थे।
तीसरी दुनिया के देशों के लोगों की आमद रोकेंगे
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, वह तीसरी दुनिया के देशों के लोगों की अमेरिका में आमद को स्थायी रूप से रोकेंगे। साथ ही अमेरिकी प्रशासन उन लोगों को देश से बाहर करने का कार्य जारी रखेगा जो अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे हैं। ट्रंप का यह कड़ा रुख हाल ही में व्हाइट हाउस के नजदीक हुई फायरिंग के बाद सामने आया है। इस फाय¨रग में अफगान मूल के बंदूकधारी ने नेशनल गार्ड के दो सदस्यों को घायल कर दिया था जिसमें से एक की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।



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