परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद : जिले के ग्राम पंचायत पिपराही के आश्रित गांव टेंगनाभाठा के नौ किसानों ने पिछले एक दशक से अधिक समय से लंबित मुआवजा भुगतान को लेकर जिला मुख्यालय में पहुंचकर अपनी पीड़ा व्यक्त की। किसानों का कहना है कि टेंगनाही जलाशय के नहर–नाली निर्माण कार्य के दौरान उनकी निजी कृषि भूमि परियोजना में अधिग्रहित कर ली गई थी, लेकिन 10 से 12 वर्ष बीत जाने के बावजूद उन्हें अब तक मुआवजा राशि प्राप्त नहीं हो सकी है।
पीड़ित किसानों ने बताया कि उन्होंने कई बार विभागीय स्तर पर अनुविभागीय जल संसाधन कार्यालय गरियाबंद में आवेदन प्रस्तुत किए, दस्तावेजों की प्रतियां जमा कीं और अधिकारियों से बार-बार संपर्क भी किया, लेकिन अब तक उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। किसान लगातार चक्कर काटते-काटते थक चुके हैं और कृषि कार्य प्रभावित होने के साथ आर्थिक संकट भी गहरा गया है।
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इसी समस्या को लेकर सभी किसान जिला मुख्यालय गरियाबंद पहुंचे और जनदर्शन में कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। किसानों ने मांग की कि उनकी अधिग्रहित भूमि का मुआवजा राशि शीघ्र स्वीकृत व प्रदाय कराया जाए ताकि उन्हें लंबे समय से चली आ रही आर्थिक परेशानी से राहत मिल सके।कलेक्टर के समक्ष दिए गए पत्र में किसानों ने उल्लेख किया कि नहर निर्माण के कारण उनकी खेती योग्य भूमि का हिस्सा स्थायी रूप से प्रभावित हुआ है, जिससे उत्पादन पर भी असर पड़ा है। इसके बावजूद वर्षो से मुआवजा लंबित रहने के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की त्वरित जांच कर संबंधित विभाग को भुगतान प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए जाएं। वहीं जल संसाधन विभाग छुरा के अधिकारी युवराम सिन्हा से इस संबंध में जानकारी लेने पर कहा गया कि सभी प्रोसेस कार्य पूर्ण हो चुका है। पहले सब डिवीजन गरियाबंद में पैसा मिलता था लेकिन सब डिवीजन छुरा बनने के बाद छुरा अनुविभागीय अधिकारी द्वारा किसानों को मुआवजा राशि छुरा में दिलाने की बात कही गई। इसी क्रम में राशि जमा होने से थोड़ा ज्यादा समय लग रहा है और सभी किसानों का एकाउंट वेरिफिकेशन हो रहा है जिसके बाद संबंधित सभी किसानों के खाते में मुआवजा राशि जल्द ही जमा होने की बात कही गई है।

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