भिंडी आमतौर पर गर्म मौसम की फसल मानी जाती है, लेकिन आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों के इस्तेमाल से अब सर्दियों में भी इसकी सफल खेती संभव हो गई है. इसके लिए पॉलीहाउस या क्रॉप कवर तकनीक का उपयोग सबसे बेहतर माना जाता है. यह फसल को ठंडी हवाओं और पाले से बचाती है. किसान अगर उचित किस्म, तापमान नियंत्रण और सिंचाई पर ध्यान दें तो सर्दियों में भी हरी और मुलायम भिंडी की भरपूर पैदावार ले सकते हैं, जिससे बाजार में ऊंचा दाम मिलना तय है.
भिंडी की खेती के लिए खेत की तैयारी सबसे महत्वपूर्ण चरण है. बुवाई से पहले खेत की दो-तीन बार गहरी जुताई करें और मिट्टी को धूप में सुखा दें ताकि कीट व रोगजनक नष्ट हो जाएं. इसके बाद अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिट्टी में मिलाएं जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहे. जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त रखें, क्योंकि भिंडी में पानी भराव से जड़ गलने का खतरा रहता है. बुवाई के लिए 3 से 4 फीट चौड़े बेड बनाएं और सुनिश्चित करें कि मिट्टी का pH मान 6 से 7.8 के बीच हो.
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आगे कहा कि सर्दियों में खेती के लिए सामान्य भिंडी की जगह ठंड सहनशील उन्नत किस्में लगाना आवश्यक है. किसानों के लिए ‘राधिका’, ‘इंडाम 9821’, ‘नूनहेम्स सिंघम’ और ‘नामधारी सीड्स एनएस-862’ जैसी किस्में बेहद उपयोगी साबित हुई हैं. ये किस्में कम तापमान में भी अच्छी वृद्धि करती हैं और उत्पादन के साथ बाजार में इनकी मांग भी अधिक रहती है. इन किस्मों से न केवल उपज में वृद्धि होती है बल्कि फल का आकार और रंग भी आकर्षक रहता है.
उन्होंने कहा कि सर्दियों की भिंडी के लिए अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक का समय उपयुक्त माना जाता है. बुवाई के लिए 2-3 सेंटीमीटर गहराई पर बीज बोएं और पौधों के बीच 30-40 सेंटीमीटर की दूरी रखें. पौधों के चारों ओर हल्की मिट्टी चढ़ाने से जड़ों को मजबूती मिलती है. यदि तापमान अत्यधिक गिरने की संभावना हो, तो पॉलीथिन शीट या नेट कवर से पौधों को ढकें ताकि ठंडी हवा से सुरक्षा हो सके.
सर्दियों में भिंडी को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती. खेत की नमी को संतुलित रखने के लिए हर 7 से 10 दिन में 15-20 मिमी पानी देना पर्याप्त है. ध्यान रखें कि अत्यधिक पानी देने से पौधों में फफूंद रोग लग सकता है. पाले से बचाव के लिए शाम के समय या सुबह जल्दी सिंचाई करें, इससे मिट्टी का तापमान नियंत्रित रहेगा और पौधे स्वस्थ रहेंगे. ड्रिप सिंचाई प्रणाली इस मौसम में सबसे उपयोगी मानी जाती है.
उन्होंने कहा कि सर्दियों में भिंडी की फसल को मुख्य रूप से व्हाइट फ्लाई और कैटरपिलर कीट नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे यलो वेन मोज़ाइक बीमारी फैलती है. इससे बचाव के लिए केवल स्वस्थ और प्रमाणित बीज का प्रयोग करें. यदि कीट दिखाई दें, तो 0.5% कार्बेरिल घोल या नीम आधारित जैविक दवा का छिड़काव करें. पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखने से वायु संचार अच्छा रहेगा और रोग फैलने की संभावना कम होगी.
भिंडी के लिए दिन का तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस और रात का 15 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहना चाहिए. पॉलीहाउस में तापमान नियंत्रण के लिए वेंटिलेशन और हीटर का प्रयोग किया जा सकता है. अगर खुले खेत में खेती की जा रही है, तो क्रॉप कवर या मल्चिंग शीट का प्रयोग करें. इससे न केवल पौधों को गर्मी मिलती है बल्कि नमी भी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे उपज की गुणवत्ता सुधरती है.
सर्दियों में हरी भिंडी की मांग हमेशा बनी रहती है क्योंकि आपूर्ति कम होती है. ऐसे में जो किसान इस मौसम में भिंडी की खेती करते हैं, उन्हें दोगुना लाभ प्राप्त होता है. बाजार में ताजी भिंडी 60-80 रुपये प्रति किलो तक बिक जाती है. आधुनिक तकनीक अपनाकर किसान प्रति एकड़ 80-100 क्विंटल तक उत्पादन पा सकते हैं. सही प्रबंधन और देखभाल से सर्दियों की यह फसल किसानों के लिए कम जोखिम और ज्यादा मुनाफे का सौदा साबित हो रही है.

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