बिलासपुर : तखतपुर और बिलासपुर के सहकारी बैंकिंग तंत्र को हिलाकर रख देने वाले मृत किसान पदुम राम सतनामी घोटाले पर आज जिला प्रशासन हरकत में आ गया। कल सामने आए इस वित्तीय फर्जीवाड़े में जहां एक किसान की मौत के बाद भी वर्षों तक उसके खाते से लाखों की निकासी और राशि का आवागमन होता रहा, वहीं आज जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रभात मिश्रा ने इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष टीम का गठन कर दिया है।
पदुम राम, जिसकी मृत्यु 26 नवंबर 2021 को हो चुकी थी, उसका खाता नियमों के खिलाफ 2023 तक सक्रिय रखा गया। मौत के चार दिन बाद 29 नवंबर को की गई बड़ी निकासी ने पूरे मामले की जड़ें हिला दीं। और सबसे बड़ा संदेह तब गहरा हुआ जब जुलाई 2023 में पूर्व प्रबंधक के दोबारा तखतपुर लौटते ही मृतक का पुराना खाता फिर ‘चालू’ कर दिया गया—जैसे यह सब सामान्य प्रक्रिया हो।अब जांच में यह बात भी उभरकर सामने आई है कि मृत किसान के खाते में अवैध रूप से उसकी पत्नी का नाम जोड़कर खाता ‘जॉइंट’ की तरह संचालित किया गया, जबकि बैंकिंग नियम मृत खाता पुनः खोलने की इजाजत नहीं देते।
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इस बीच जिले में चर्चाएं तेज हैं कि यह मामला केवल एक किसान तक सीमित नहीं है। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार 3–4 दर्जन मृत किसानों के खातों में इसी तरह की गड़बड़ियों के संकेत हैं, जिनकी कुल रकम 80 करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
घोटाले के केंद्र में आए वर्तमान शाखा प्रबंधक सूर्यकांत जायसवाल पर सवाल और गहरे हो गए हैं। आरोप है कि बेलतरा पदस्थापना के दौरान भी वह करोड़ों के रिवॉल्विंग फंड घोटाले में संदिग्ध पाए गए थे, लेकिन हर बार बचकर निकलते रहे। अब तखतपुर में मृत किसान के खाते को सालों तक खोलकर रखा जाना उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। किसान संगठनों और स्थानीय लोगों की मांग है कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए जायसवाल को तत्काल हटाया जाए, क्योंकि वह यूनियन नेता भी हैं और जांच को प्रभावित कर सकते हैं।आज जांच टीम में सहायक लेखापाल रवि सिंह और लेखापाल पवन क्षत्रिय का नाम शामिल किया गया है। टीम एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सौंपेगी।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रभात मिश्रा ने कहा,
“मामला अत्यंत गंभीर है। दो सदस्यीय टीम गठित की गई है। टीम को सात दिन के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है। रिपोर्ट आते ही दोषी चाहे कोई भी हो—उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ी तो वर्तमान प्रबंधक को भी हटाया जाएगा ताकि जांच बिल्कुल निष्पक्ष रहे।”
किसान समुदाय में इस बात की गूंज तेज है कि आखिर कब तक मृत किसानों के नाम पर सहकारी बैंकिंग प्रणाली में पैसे की लूट चलती रहेगी। जिले में अब लोग इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि इस महाघोटाले की परतें आखिर कब तक खुलती हैं और पहली कार्रवाई किस पर होती है।

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