गड़बड़ी या लापरवाही:एक करोड़ का टेंडर… 61 लाख जारी, फिर भी नहीं हो सका 50 फीसदी निर्माण

गड़बड़ी या लापरवाही:एक करोड़ का टेंडर… 61 लाख जारी, फिर भी नहीं हो सका 50 फीसदी निर्माण

 गरियाबंद : स्कूल शिक्षा विभाग ने फरवरी 2025 में जिले के 5 ब्लॉक के स्कूलों के लिए 116 काम की वित्तीय मंजूरी दी थी। प्रत्येक शौचालय 1 लाख 3 हजार में बनाए जाने थे। लेकिन कलेक्टर के अनुमोदन पर फिर से शिक्षा विभाग ने यह काम आदिवासी विकास विभाग को दे दिया। हैरानी की बात तो यह है कि जिस ट्राइबल डिपार्टमेंट के पास 2 साल से स्कूल जतन के भवन निर्माण कराने की बड़ी जवाबदारी पहले से है, वहां फिर से शौचालय निर्माण क्यों दे दिया गया। शौचालय जैसे छोटे काम पंचायत को भी दिया जा सकता था, पर अफसरों ने अर्थशास्त्र साधने, अति आवश्यक शौचालय कार्य का भूगोल बिगाड़ कर रख दिया। जुलाई माह में दुर्ग के कंचन कंस्ट्रक्शन के साथ गुपचुप अनुबंध कर उसे 61 लाख की अग्रिम राशि भी जारी कर दी गई। एक ही फर्म को इतनी संख्या में काम के सवाल पर प्रभारी सहायक आयुक्त नवीन भगत ने कहा कि कलेक्टर सर के निर्देश पर काम जारी किया गया है। काम की प्रगति संतोषप्रद नहीं पाई जाती है तो कलेक्टर से मार्गदर्शन लेकर उचित कार्रवाई की जाएगी।

जानबूझकर किया गया चूक या सोची-समझी फायदेमंद चाल

निर्माण एजेंसी चयन के लिए अफसरों ने दूरदर्शिता नहीं दिखाई। ट्राइबल विभाग के पास पहले से 18 करोड़ के निर्माण कार्य पड़े हुए थे, जिसके निर्माण में विलंब हो रहा था, फिर भी ट्राइबल विभाग को एजेंसी बनाया गया। जिले भर में फैले इस काम को 90 दिन के भीतर पूर्ण कराने फर्म के पास पर्याप्त संसाधन के अलावा एक बड़ी टीम चाहिए थी, फर्म बाहरी होने के कारण यह संभव ही नहीं था। फिर भी आंख मूंदकर काम दे दिया गया। इसलिए इस अनुबंध को सोची-समझी फायदेमंद समझौता की चर्चा जोरों पर है।

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सरपंच संघ लगा चुके हैं उपेक्षा का आरोप

तय नियम के अनुसार 20 लाख तक का निर्माण कार्य सरपंचों को दिया जा सकता है। लेकिन नए सत्र के सरपंचों के हाथ में काम नहीं के बराबर है। सरपंच संघ के मुखिया पन्ना लाल ध्रुव ने कहा कि अपने ही ग्राम के बच्चों के संसाधन को स्थानीय सरपंच बाहरी ठेकेदार से बेहतर ही बनाता। प्रशासन लगातार निर्माण कार्य में सरपंचों की उपेक्षा कर रहा है। आपको बता दें कि तीन सूत्रीय मांगों को लेकर जिले भर के सरपंचों ने 28 नवंबर को धरना प्रदर्शन किया था।

देवभोग के 20 काम में एक भी शुरू नहीं

सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 116 शौचालयों में से 28 मैनपुर, 26 गरियाबंद, 8 फिंगेश्वर, 33 छुरा व 20 देवभोग ब्लॉक में मंजूर हैं। देवभोग के 20 शौचालय समेत 60 से ज्यादा शौचालयों का निर्माण ही शुरू नहीं किया गया है। कहा जा रहा है जिले भर में फैले इस काम को कराने अलग-अलग फर्मों को काम देने के बजाय दुर्ग की एक सिंगल फर्म को काम दिया गया। संसाधनों के अभाव में और जिले के प्रमुख अफसर का संरक्षण प्राप्त होने के कारण ठेकेदार काम शुरू करने में अपनी मनमानी कर रहा है।

रिपोर्ट आने के बाद की जाएगी कार्रवाई – कलेक्टर

गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने कहा कि जिस फर्म को काम दिया गया है वह काम कर लेगा। मैंने अभी इसका फॉलोअप नहीं लिया है। रिपोर्ट लेता हूं, अगर काम नहीं हो रहा है तो एजेंसी पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

 







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