सफलता की कहानी : बरदर के किसान सुशील कुमार की सुव्यवस्थित खरीदी व्यवस्था ने बढ़ाया भरोसा, सरकार को दिया धन्यवाद

सफलता की कहानी : बरदर के किसान सुशील कुमार की सुव्यवस्थित खरीदी व्यवस्था ने बढ़ाया भरोसा, सरकार को दिया धन्यवाद

एमसीबी : खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 किसानों के लिए उम्मीद, सम्मान और विश्वास की नई दिशा लेकर आया है। बरदर उपार्जन केंद्र पहुंचने पर ग्राम बरदर के किसान सुशील कुमार का इस बार का अनुभव बिल्कुल अलग था। अपनी मेहनत से उपजाए 100 क्विंटल धान को लेकर जैसे ही वे केंद्र पहुंचे, उन्हें हर कदम पर बदलाव और सुचारु व्यवस्था का एहसास हुआ।

उपार्जन केंद्र में बेमिसाल व्यवस्था
सुशील कुमार का कहना है कि इस बार उपार्जन केंद्र का माहौल पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। परिसर साफ-सुथरा था, किसानों के लिए व्यवस्थित कतारें थीं, पर्याप्त बारदाने की उपलब्धता थी, साथ ही पीने के पानी और बैठने की सुविधा ने पूरी प्रक्रिया को सहज और सम्मानजनक बना दिया। तौल प्रक्रिया में रही पारदर्शिता ने किसानों का भरोसा और मजबूत किया।

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किसानों की मेहनत को मिल रहा सम्मान
सुशील कुमार मुस्कुराते हुए बताते हैं कि पहले खरीदी को लेकर हमेशा भीड़, देरी और समस्याएँ सामने आती थीं, लेकिन इस बार न कोई अव्यवस्था दिखी और न ही किसी प्रकार की परेशानी। उन्होंने कहा कि इस बार ऐसा लगा मानो किसानों की मेहनत को वास्तव में सम्मान मिल रहा है और पूरी प्रक्रिया किसानों को केंद्र में रखकर बनाई गई है।

समर्थन मूल्य ने बढ़ाई आर्थिक सुरक्षा
राज्य सरकार द्वारा घोषित 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और प्रति एकड़ 21 क्विंटल खरीदी सीमा को सुशील कुमार किसानों की आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बताते हैं। वे कहते हैं कि इस निर्णय ने किसानों को सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ने का आत्मविश्वास दिया है।

मुख्यमंत्री को किसान ने दिया धन्यवाद
व्यवस्था से प्रभावित होकर सुशील कुमार ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में खरीदी व्यवस्था में आए सुधारों ने किसानों को राहत और विश्वास दोनों प्रदान किए हैं। उनके अनुसार यह बदलाव किसानों के जीवन में सकारात्मक असर ला रहा है।

पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा
बरदर उपार्जन केंद्र का सकारात्मक अनुभव न सिर्फ सुशील कुमार के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणादायक बन रहा है। यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब व्यवस्थाएँ संवेदनशील, सुव्यवस्थित और पारदर्शी होती हैं, तो किसान केवल फसल ही नहीं उगाते, बल्कि राज्य के भविष्य की मजबूत नींव भी तैयार करते हैं।







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