सेवानिवृत्त कर्मचारियों से लाखों रुपये की रिकवरी का मामला,रिटायरमेंट से दो दिन पहले थमाया नोटिस

सेवानिवृत्त कर्मचारियों से लाखों रुपये की रिकवरी का मामला,रिटायरमेंट से दो दिन पहले थमाया नोटिस

बिलासपुर : दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मंडल में सेवानिवृत्त कर्मचारियों से लाखों रुपये की रिकवरी का मामला गहराता जा रहा है। वाणिज्य और परिचालन विभाग के जिन कर्मचारियों ने वर्ष 2024 में सेवानिवृत्ति ली, उन्हें रिटायर होने के ठीक दो दिन पहले नोटिस थमाकर बताया गया कि उनके वेतन में वर्षों से अधिक भुगतान हो रहा था और उसी की वसूली की जाएगी। नोटिस के साथ ही उनके सेवानिवृत्ति देयकों से बड़ी राशि काट ली गई, जिसके बाद अब रिटायर्ड कर्मचारी अपने जीवनभर की कमाई की वापसी के लिए विभागीय कार्यालयों के चक्कर काटने पर मजबूर हैं।

सेवानिवृत्त कर्मचारियों का कहना है कि वे यह जानकर स्तब्ध रह गए कि रिटायरमेंट की पूर्व संध्या पर ही उन्हें यह सूचना दी गई कि उनका वेतन वर्षों से गलत तरीके से अधिक दिया जा रहा था। उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि गलती कब से हो रही थी, कितनी अवधि का भुगतान “अधिक” माना गया और कौन-सा नियम लागू किया गया। न तो उनका पक्ष सुना गया और न किसी सुनवाई का अवसर दिया गया। इसके बाद देयक से एकमुश्त राशि काट ली गई, जिससे कई कर्मचारियों की रिटायरमेंट की वित्तीय योजना ही चरमरा गई।

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रमेश चंद्र पंडा, पुरन बहादुर, तुहीन घोष, दिलीप कुमार दास और सुरेश चौबे सहित दर्जनों कर्मचारियों से दो से तीन लाख रुपये तक वसूले गए हैं। प्रभावित कर्मचारियों का अनुमान है कि करीब सौ रिटायर्ड कार्मिकों को इसी तरह की कटौती का सामना करना पड़ा है। कई लोगों ने कहा कि रिटायरमेंट के इतने करीब आकर उन्हें इस तरह के नोटिस की उम्मीद नहीं थी और यह पूरी प्रक्रिया उनके साथ अन्याय जैसा महसूस होती है।

कटौती से परेशान कर्मचारियों ने मान्यता प्राप्त यूनियन के माध्यम से रेलवे बोर्ड तक अपनी शिकायत पहुंचाई। बोर्ड ने जोनल मुख्यालय को रिपोर्ट मांगी, जिसके बाद संयुक्त कमेटी का गठन किया गया। लेकिन संयुक्त कमेटी ने केवल इतना निर्णय लिया कि अब भविष्य में रिटायर्ड कर्मचारियों से वसूली नहीं की जाएगी। जिनसे पहले ही लाखों रुपये काट लिए गए हैं, उनकी राशि वापस करने पर कमेटी ने कोई ठोस निर्णय नहीं दिया। इससे नाराज कर्मचारी अब दोबारा मुख्य कार्मिक अधिकारी तक पहुंचे हैं।

मुख्य कार्मिक अधिकारी ने मामले को बिलासपुर मंडल कार्मिक कार्यालय, लेखा विभाग और सटलमेंट शाखा को भेज दिया है, जिसके बाद कर्मचारी इन तीनों कार्यालयों के बीच घूमते हुए समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। एक कर्मचारी ने कहा कि “किस कार्यालय में जाएँ, कौन सुनेगा और कब न्याय मिलेगा, इसका कोई जवाब नहीं है। रिटायरमेंट के बाद जीवन आसान होने की उम्मीद थी, लेकिन यह विवाद हमारे लिए तनाव का कारण बन गया है।”

कानूनी स्थिति इस पूरे मामले को और गंभीर बनाती है। सुप्रीम कोर्ट, CAT और स्वयं रेलवे_BOARD की स्पष्ट गाइडलाइन के अनुसार, कर्मचारी के रिटायर होने के चार वर्ष पहले उसके सभी वेतन रिकॉर्ड को अपडेट करना अनिवार्य है। यदि किसी प्रकार की अतिरिक्त भुगतान की त्रुटि मिले, तो उसकी वसूली कर्मचारी के कार्यकाल के दौरान किस्तों में होनी चाहिए। रिटायरमेंट के अंतिम दिनों में अचानक एकमुश्त वसूली करना न्यायालयों के आदेशों के विरुद्ध है। अदालतों ने कई मामलों में यह भी कहा है कि किसी भी प्रकार की रिकवरी तभी मान्य होगी जब कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस और समुचित सुनवाई दी जाए।

इन नियमों के बावजूद बिलासपुर मंडल में की गई इस कार्रवाई से प्रभावित कर्मचारियों का धैर्य टूटता दिख रहा है। कई सेवानिवृत्त कर्मचारी अब कानूनी सलाह ले रहे हैं और बिलासपुर हाईकोर्ट में जाने का मन बना चुके हैं। उनका कहना है कि विभागीय तंत्र में समाधान की कोई स्पष्ट दिशा नज़र नहीं आ रही, इसलिए न्यायालय ही अंतिम विकल्प बचा है।

एक कर्मचारी ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि “रिटायरमेंट के दो दिन पहले हमारी पेंशन और जीवनभर की जमा पूंजी से लाखों रुपये काट लेना न सिर्फ गलत है बल्कि अमानवीय भी है। यह हमारी मेहनत का हक है, जिसे हम वापस लेकर रहेंगे।”







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