सर्दियों में होने वाली गाजर की खेती किसानों के लिए शानदार मुनाफा देने वाली फसल बन गई है. यह फसल कम समय में तैयार होती है, देखभाल भी कम लगती है और बाजार में इसकी मांग साल भर बनी रहती है. घरेलू उपयोग से लेकर जूस, हलवा और प्रोसेसिंग उद्योग तक, हर जगह गाजर की खपत लगातार रहती है, इसलिए किसान इसे पूरे साल उगाकर कमाई कर सकते हैं. गर्मियों में इसकी डिमांड सबसे ज्यादा रहती है, जिससे किसानों को और बेहतर कीमत मिलती है.
कम लागत में बढ़िया कमाई
गाजर की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें बीमारी या कीट कम लगते हैं, इसलिए खर्च भी बहुत कम होता है. यही वजह है कि किसान कम लागत में अच्छा मुनाफा ले पा रहे हैं. बाराबांकी जिले के सहेलियां गांव के रहने वाले किसान करन यादव ने भी पारंपरिक फसलों की जगह गाजर की खेती शुरू की और अब वह करीब 2 बीघे में गाजर उगाकर एक फसल से 90 हजार से 1 लाख रुपये तक कमा रहे हैं.
करन यादव बताते हैं कि गाजर की बाजार में हमेशा डिमांड रहती है और यह फसल खर्च कम और फायदा ज्यादा देने वाली है. एक बीघे में लगभग 10 से 12 हजार रुपये तक लागत आती है और तैयार फसल से करीब 1 लाख रुपये तक मुनाफा हो जाता है. इसमें ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि रोग बहुत कम लगते हैं और कीटनाशक दवाओं का खर्च भी लगभग नहीं के बराबर होता है. बस समय पर सिंचाई जरूरी है.
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कैसे होती है गाजर की खेती
करन यादव बताते हैं कि गाजर की खेती करना बेहद आसान है. सबसे पहले खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई कर ली जाती है और उसमें गोबर या अन्य जैविक खाद मिलाई जाती है. इसके बाद पूरे खेत में गाजर के बीजों की बुवाई की जाती है. पौधे निकलने के लगभग दो हफ्ते बाद पहली सिंचाई की जाती है. इसके बाद हल्की मात्रा में यूरिया का प्रयोग किया जाता है. करीब ढाई से तीन महीने में फसल पूरी तरह तैयार हो जाती है.
कौन-सी मिट्टी होती है सबसे बेहतर
गाजर की अच्छी पैदावार के लिए बलुई और दोमट मिट्टी सबसे उत्तम मानी जाती है. भुरभुरी और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में भी गाजर आसानी से उगाई जा सकती है.

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