धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले को औषधीय एवं सुगंधीय पौधों के कृषिकरण में उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रीय सम्मान दिया गया है. नई दिल्ली स्थित कृषि मेला ग्राउंड में ICAR एवं कृषि जागरण द्वारा आयोजित महाकुंभ 2025 में यह सम्मान मिला. धमतरी जिला कार्यक्रम प्रबंधक (आजीविका) अनुराग मिश्रा ने यह सम्मान लिया.
धमतरी ने बढ़ाया प्रदेश का मान
यह उपलब्धि धमतरी जिले में चल रहे अभिनव आजीविका प्रयासों और औषधीय खेती को बढ़ावा देने की वजह से मिली है. धमतरी जिले के कुरूद, कुहकुहा, कन्हारपुरी, गुदगुदा, मगरलोड क्षेत्रों में बच, खस, पचौली, सिंदूर, ब्राह्मी और लेमन ग्रास जैसी औषधीय फसलों का उत्पादन किया जा रहा है. नगरी क्षेत्र में महानदी तट पर लगभग 4000 औषधीय पौधे लगाए गए हैं, जिससे भविष्य में किसानों की आय में बढ़ोतरी की उम्मीद है. धमतरी जिले को मखाना बोर्ड में भी शामिल किया गया है.
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130 एकड़ में औषधीय पौधे
धमतरी जिले में इस साल 130 एकड़ में औषधीय पौधे लगाए गए हैं. खास बात यह है कि इसके लिए 100% मार्केट लिंकेज की व्यवस्था भी की गई है. मनरेगा अभिसरण (MGNREGA Convergence), मल्टी-क्रॉप मॉडल से बिहान की 300 से ज्यादा महिलाओं को आजीविका संवर्धन (livelihood promotion) के साथ ही अपनी आय बढ़ाने (income growth) का मौका मिल रहा है. औषधीय फसलों पर आधारित इस मॉडल से धमतरी जिले को बहुत फायदा मिल रहा है.
खेती का विस्तार
धमतरी, कुरूद और मगरलोड ब्लॉक में ब्राह्मी, पचौली, लेमन ग्रास और खस की खेती का विस्तार हुआ है.
यह सम्मान जिले के किसान, महिला स्व सहायता समूह और मैदानी अमले की सामूहिक मेहनत का परिणाम है. औषधीय पौधों की खेती से जुड़कर जिले के किसान आत्मनिर्भरता और ज्यादा आय की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं-अबिनाश मिश्रा, कलेक्टर
कलेक्टर ने टीम धमतरी, बिहान और कृषि विभाग के प्रयासों की प्रशंसा की और सभी को बधाई दी है. धमतरी जिले में औषधीय खेती को बढ़ावा देने, मखाना उत्पादन के विस्तार, क्लस्टर मॉडल, वैल्यू एडिशन इकाइयों के साथ ही महिलाओं की आर्थिक उन्नति के लिए किए जा रहे प्रयास, जिले को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला रहे हैं. यह उपलब्धि धमतरी को औषधि आधारित आजीविका मॉडल के अग्रणी जिलों में स्थापित कर रही है.
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