बिलासपुर : जिले के कोटा थाना क्षेत्र में घोरामार निवासी युवक धीरज साहू की हत्या और शव को तालाब में फेंकने की सनसनीखेज वारदात ने पूरे इलाके में शोक और भय का माहौल बना दिया था। पुलिस ने इस जटिल मामले का मात्र तीन दिनों में खुलासा कर दिया है और घटना में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मृतक धीरज साहू के परिजनों के अनुसार, 30 नवंबर की रात वह अपने पोल्ट्री फार्म में सोने गया था। लेकिन अगली सुबह उसका परिवार उसे फार्म में नहीं पाया।
मोबाइल फोन बंद होने और कोई सुराग न मिलने से परिजनों की चिंता बढ़ गई। इसके बाद 1 दिसंबर को धीरज साहू के परिजनों ने कोटा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। लगातार खोजबीन के दौरान 7 दिसंबर को ग्राम घोरामार के बांधा तालाब में एक युवक का शव संदिग्ध स्थिति में तैरता मिला। जांच में मृतक की पहचान धीरज साहू के रूप में हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या के स्पष्ट संकेत मिले, जिसके बाद पुलिस ने मर्ग को हत्या के मामले में बदल दिया और जांच को तेज कर दिया।
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जांच का विस्तृत विवरण
पुलिस ने मामले की गहन जांच के लिए सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगाले और हजारों मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण किया। साथ ही मृतक के परिवार, दोस्तों और परिचितों से विस्तृत पूछताछ की। इस गहन जांच के दौरान दो लोग अनिल साहू और जगन्नाथ उर्फ अंगद साहू संदिग्ध स्थिति में आए। उन्हें हिरासत में लिया गया और पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपराध स्वीकार कर लिया।
पुरानी रंजिश बनी हत्या की वजह
पुलिस के अनुसार, आरोपी अनिल साहू और मृतक धीरज साहू के बीच करीब एक साल से विवाद चल रहा था। इसी पुरानी रंजिश के चलते दोनों ने धीरज को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। 30 नवंबर की रात लगभग 11:30 बजे दोनों आरोपी मोटरसाइकिल से सिविल साहू के प्लॉट के पास पहुंचे। उन्होंने मोटर पंप निकालने का बहाना बनाकर धीरज को बाहर बुलाया। मौके पर चाकू से धीरज की निर्दयता से हत्या कर दी गई। पहचान छुपाने के लिए शव में पत्थर बांधे और उसे बांधा तालाब में फेंक दिया। वारदात में उपयोग किए गए चाकू, मृतक के कपड़े और मोबाइल फोन को आरोपी कोरी डेम में फेंकने के बाद वहां से चले गए।
तकनीकी और गहन पूछताछ का परिणाम
पुलिस के तकनीकी विश्लेषण और संदिग्धों की गतिविधियों पर पैनी नजर ने इस जटिल मामले को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई। आरोपी धीरज की हत्या की घटना को छुपाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस की तत्परता और रणनीति ने केवल तीन दिनों में हत्या का पर्दाफाश कर दिया। गिरफ्तार आरोपियों को पुलिस ने जेल भेज दिया है। पुलिस ने कहा कि मामले की आगे की जांच जारी है और अन्य पहलुओं की पुष्टि की जाएगी। यह मामला पुलिस की तेजी और तकनीकी दक्षता का उदाहरण भी माना जा रहा है।

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