बिलासपुर: रेंज साइबर थाना बिलासपुर ने ऑनलाइन साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले मुख्य सप्लायर को गिरफ्तार कर बड़ा खुलासा किया है। आरोपी दीपक विश्वकर्मा पिछले छह महीने से फरार था और बिलासपुर रेंज में दर्ज पांच अलग-अलग मामलों में पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। साइबर क्राइम पोर्टल में लगातार बढ़ती शिकायतों के बाद बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक डॉ. संजीव शुक्ला और पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के मार्गदर्शन में विशेष अभियान चलाया गया, जिसके बाद आरोपी को पकड़ा जा सका।
आरोपी दीपक विश्वकर्मा, निवासी हेमूनगर तोरवा, वर्तमान में रायपुर के अमलीडीह स्थित अपार्टमेंट में रहता था। वह फर्जी बैंक खातों को साइबर अपराधियों तक पहुंचाने का काम लंबे समय से कर रहा था। पुलिस जांच में सामने आया कि दीपक न केवल खुद कई बैंक खातों को खुलवाता था बल्कि दूसरों को 5,000 से 10,000 रुपए का कमीशन देकर उनके नाम पर भी खाते खुलवाकर साइबर गैंग तक पहुंचाता था। यही बैंक खाते “म्यूल अकाउंट” के रूप में देशभर में ऑनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट, शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड, क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट, टेलीग्राम टास्क, केवाईसी अपडेट और गूगल सर्च स्कैम जैसे मामलों में इस्तेमाल किए जा रहे थे।
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पुलिस को जब म्यूल अकाउंट से जुड़े खाता धारकों की पहली गिरफ्तारी मिली, तब से ही दीपक फरार हो गया था। पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा और रेलवे में कोच अटेंडर बनकर यूपी, दिल्ली और भोपाल तक यात्रियों के बीच घूमते हुए म्यूल अकाउंट अपने साथियों तक पहुंचाता था। तकनीकी विश्लेषण, बैंक खाता लेन-देन की जांच, साइबर पोर्टल रिपोर्ट और मोबाइल ट्रैकिंग के आधार पर पुलिस ने आरोपी की गतिविधियों का लोकेशन पैटर्न तैयार किया और अंतत: बिलासपुर में उसे दबोच लिया।
पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि यह पूरा नेटवर्क उसके संपर्क में रहने वाले युवकों और साइबर गैंग के सक्रिय सदस्यों के बीच चलता था। वह पहले अपने नाम पर कई खाते खुलवाता था, फिर दूसरों को लालच देकर उनके खाते हासिल करता और उन्हें आगे बढ़ा देता था। फर्जी खातों में होने वाले लाखों के साइबर फ्रॉड ट्रांजैक्शन उन्हीं खातों के जरिए किए जाते थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी रेल्वे कोर्ट बिलासपुर के एक पुराने मामले में भी फरार था।

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