घर में छोटा सा हर्बल गार्डन बनाना आसान होने के साथ बेहद फायदेमंद भी है. तुलसी, पुदीना और एलोवेरा जैसे पौधे कम देखभाल में गमलों या बालकनी में आसानी से उगाए जा सकते हैं. ये न सिर्फ रसोई को ताज़ा और प्राकृतिक सामग्री देते हैं, बल्कि सेहत के लिए भी लाभकारी हैं. सही धूप, सीमित पानी और समय-समय पर कटाई से ये पौधे लंबे समय तक अच्छे रहते हैं और इम्युनिटी, पाचन व त्वचा की देखभाल में मदद करते हैं.
अपने घर में एक छोटा सा हर्बल गार्डन बनाना सबसे आसान और फायदेमंद शौक है. यह सिर्फ हरियाली नहीं लाता, बल्कि आपकी रसोई को ताज़ा, प्राकृतिक और सेहतमंद चीज़ों से भी भर देता है. तुलसी, पुदीना और एलोवेरा जैसे पौधे बहुत कम देखभाल में भी खूब फलते-फूलते हैं. आप इन्हें गमलों में किचन की खिड़की पर या बालकनी में आसानी से उगा सकते हैं. गार्डनिंग एक्सपर्ट रमेश कुमार के अनुसार ये पौधे न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाते हैं, बल्कि कई छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी एक प्राकृतिक उपचार का काम करते हैं. चलिए जानते हैं इन तीन सुपर हर्ब्स प्लाटिंग के बारे में.
इन पौधों को उगाना बिल्कुल रॉकेट साइंस नहीं है. सबसे पहले ऐसे गमलों का इस्तेमाल करें, जिनके नीचे ड्रेनेज होल हों ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके. अच्छी क्वालिटी की पॉटिंग मिट्टी का इस्तेमाल करें. तुलसी और पुदीने को रोज़ाना कम से कम 4 से 5 घंटे की धूप ज़रूर दें, जबकि एलोवेरा को तेज धूप की जगह उजाले वाली जगह पर रखें. सबसे बड़ी गलती ओवरवाटरिंग यानी ज्यादा पानी देने की होती है. मिट्टी को दोबारा पानी देने से पहले हल्का सूखने दें. पुदीने को समय-समय पर काटते रहें, ताकि यह ज्यादा फैले.
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उन्होंने बताया कि हर्ब्स का सही तरीके से इस्तेमाल करना भी ज़रूरी है. तुलसी और पुदीने की पत्तियों को तोड़ते वक्त स्टेम के ऊपर से तोड़ें, इससे पौधा और घना होगा. कभी भी एक बार में सारी पत्तियां न तोड़ें. ताज़ी पत्तियों को सीधे खाने में इस्तेमाल करें या चाय बनाएं. एलोवेरा का पत्ता काटकर उसे धो लें, फिर छिलका उतारकर अंदर का जेल निकाल लें. इन हर्ब्स को आप धोकर और सुखाकर भी स्टोर कर सकते हैं. इनकी चटनी, कड़ी, सूप, ड्रिंक्स और फेस पैक बनाए जा सकते हैं.
तुलसी को द क्वीन ऑफ़ हर्ब्स भी कहा जाता है. यह सिर्फ एक धार्मिक पौधा नहीं, बल्कि एक पावरहाउस हर्ब है. इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं. रोज़ सुबह कुछ तुलसी के पत्ते चबाने से इम्यून सिस्टम मज़बूत होता है और सर्दी-खांसी से राहत मिलती है. यह तनाव कम करने और पाचन को दुरुस्त रखने में भी मददगार है. इसकी चाय बनाकर पीने से गले की खराश ठीक होती है. तुलसी का पौधा लगाना बहुत आसान है और यह पूरे साल चलता है.
पुदीना यानी मिंट को द कूल रिफ्रेशर कहा जाता है. यह अपनी ठंडी तासीर और ताज़ा खुशबू के लिए मशहूर है. यह किचन गार्डन का एक बेहतरीन एडिशन है. पुदीना पाचन के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. इसकी चटनी, रायता या सिर्फ इसकी चाय पेट की गड़बड़ी, एसिडिटी और बदहजमी में राहत देती है. इसकी खुशबू सिरदर्द और जी मिचलाने की समस्या को कम करती है. गर्मियों में पुदीने का शरबत शरीर को ठंडा रखता है. यह पौधा बहुत तेजी से फैलता है, इसलिए इसे अलग गमले में लगाना ही बेहतर होता है, वरना यह बगीचे पर कब्ज़ा कर सकता है.
एलोवेरा एक ऐसा मैजिकल प्लांट है जिसे घर में होना बहुत ज़रूरी है. इसे नेचुरल हीलर भी कहा जाता है. इसके गूदे में भरपूर मात्रा में विटामिन, मिनरल और एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं. चोट लगने, जलने या त्वचा पर कहीं खरोंच आने पर एलोवेरा जेल लगाने से जल्दी आराम मिलता है. यह सनबर्न के लिए भी बेहतरीन है. त्वचा और बालों की देखभाल के लिए भी इसका कोई जवाब नहीं है. पीने के लिए भी एलोवेरा जूस फायदेमंद होता है. यह पौधा मोटे, गूदे भरे पत्तों वाला होता है और बहुत कम पानी में भी पनप जाता है.

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