रायपुर/छत्तीसगढ़ : राज्य में बढ़ती कथित कन्वर्जन घटनाओं और उससे उपजे सामाजिक तनाव को लेकर सर्व समाज ने कड़ा विरोध व्यक्त करते हुए 24 दिसंबर को प्रदेशव्यापी बंद का आह्वान किया है। रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में विभिन्न सामाजिक एवं जनजातीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि कांकेर जिले के आमाबेड़ा में 15–18 दिसंबर के बीच हिंदू जनजातीय समाज पर हुए हमले ने प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सर्व समाज का कहना है कि यह घटना पहली नहीं है; विभिन्न जिलों में बीते समय में भी कन्वर्जन और उससे जुड़े टकराव की घटनाएँ सामने आती रही हैं, जिससे जनजातीय क्षेत्रों में वैमनस्य और असंतोष बढ़ा है। प्रेस वार्ता में प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि पाँचवीं अनुसूची क्षेत्रों में ग्रामसभा की संवैधानिक भूमिका और जनजातीय आस्था की सुरक्षा की उपेक्षा हुई है। साथ ही जिला पुलिस-प्रशासन की कथित निष्क्रियता, बाहरी संगठनों की भूमिका और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई ने तनाव को और बढ़ाया है।
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प्रदेशव्यापी बंद को कई सामाजिक, व्यावसायिक संगठनों तथा छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स ने समर्थन दिया है। बंद के दौरान जिला प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा और प्रत्येक जिले में बैठकें आयोजित होंगी। प्रेस वार्ता को केंद्रीय अध्यक्ष छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज खेड़िस राम कश्यप, उमेश कच्छप उरांव समाज प्रमुख, कृष्ण कुमार खेलकर प्रदेश संरक्षक प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज, बंशीलाल कुर्रे (पूर्व एएसपी) राजमहंत छत्तीसगढ़ सतनामी समाज, प्रमोद कुमार नामदेव (श्री नामदेव समाज विकास परिषद), बसंत तारख धीवर समाज, प्रदीप साहू प्रदेश सयुक्त सचिव छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ, विकास चंद्र सिन्हा छत्तीसगढ़ कलार समाज, उमर कांत सिन्हा प्रांतीय कार्यकारिणी छत्तीसगढ़ कलार समाज ने संयुक्त रूप से संबोधित किया जिसमें अनेक समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे.
सर्व समाज ने सरकार से प्रमुख यह 5 माँगें रखीं हैं
1. धर्म स्वातंत्र्य कानून का कड़ाई से लागू होना और कन्वर्जन से जुड़ी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई।
2. आमाबेड़ा हमले के सभी आरोपियों, विशेषकर भीम आर्मी व संबंधित समूहों पर कठोर धाराओं में त्वरित कार्रवाई।
3. कांकेर एसपी इंदिरा कल्याण एलेसेला का निलंबन तथा उनकी भूमिका की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच।
4. एसडीएम ए.एस. पैकरा और तहसीलदार सुधीर खलखो का निलंबन और निष्पक्ष जांच।
5. जनजातीय ग्रामीणों पर की गई सभी पक्षपातपूर्ण कार्रवाइयों को निरस्त, दर्ज प्रकरण वापस किए जाएँ तथा पीड़ितों को मुआवजा प्रदान किया जाए।

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