सरगुजा : पेशा एक्ट दिवस पर जिले के लखनपुर विकासखंड के खदान प्रभावित ग्राम परसोडी कला में ग्राम सभा ( संगोष्ठी)का आयोजन किया गया। इस ग्राम सभा में बड़ी संख्या में आसपास गांवों के ग्रामीण शामिल हुए और बाहर से आए वक्ताओं के द्वारा उपस्थित ग्रामवासियों को पेशा एक्ट नियम के संबंध में विस्तार से जानकारी दी । वक्ताओं ने उपस्थित लोगों से कहा की छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा संभाग पांचवी अनुसूचित क्षेत्र में शामिल है। पेशा एक्ट कानून आदिवासी और पांचवी अनुसूची क्षेत्र में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने और उन्हें स्वशासन का अधिकार देता है। पेसा एक्ट कानून को लेकर जागरूकता कार्यक्रम क्षेत्र के गांव गांव में चलाया जाएगा। ग्रामीणों के साथ हुए अन्याय को लेकर एक जुट होकर लड़ाई लड़ने हेतु जागरूकता लाने पर विशेष चर्चा की गई गौरतलब है कि अमेरा कोल परियोजना विस्तार में हुए ग्रामीण और प्रशासन के बीच झड़प के बाद खुली खदान मामले को लेकर के विगत दिन क्षेत्र के ग्रामीण नव पदस्थ सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत के समक्ष न्याय दिलाये जाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद सरगुजा कलेक्टर ने राज्य और केंद्र सरकार के नियमों के तहत ही खनन कार्य करने पुनर्वास और नौकरी के संबंध में विधि के अनुसार निराकरण करने कोल प्रभावित ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया था।
देव स्थलों को किया गया नुकसान, हमारी आस्था के साथ हुआ खिलवाड़
आयोजित सभा में ग्रामीणों ने बताया कि गांव का सिवरिहा देवता के नाम से प्रसिद्ध देव स्थल का खदान विस्तार के दौरान खोद दिया गया जिसे प्रशासन हमारे आस्था के साथ खिलवाड़ किए हैं, इस मामले को लेकर के ग्रामीणों के बीच एक विरोध जागृत हुआ जिसको लेकर के ग्रामीणों ने कहा कि अन्य समाज एवं अन्य धर्म के लोगों के आस्था के साथ कोई भी व्यक्ति खिलवाड़ नहीं कर सकता तो हमारे आस्था के साथ इस प्रकार से खिलवाड़ क्यों किया गया। इस पर प्रबंधन के उपर कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए।
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ग्रामीणों ने कहा जब तक है जान तब तक यह लड़ाई रहेगी जारी
खदान प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि शासन प्रशासन के द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से कॉल बैरिंग एक्ट का हवाला देकर अमेरा खदान का विस्तार को लेकर भू अर्जन किया गया है। जब किया पांचवी अनुसूची क्षेत्र है और ग्राम सभा का निर्णय ही सर्वमान्य होता है। ग्राम सभा के सहमति लिए बिना शासन प्रशासन के द्वारा एक तरफा कार्यवाही की गई है।गांव में कई पीढ़ी से निवास करने वाले ग्रामीणों को उनकी ही जमीन से बेदखल किया जा रहा है। जब तक शरीर में जान है तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी। अपनी जमीन बचाने के लिए कोई भी लड़ाई लड़ने को तैयार है।

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