युक्तियुक्तकरण के 6 माह बाद भी ज्वाइन नहीं करने वाले 9 शिक्षकों को आरोप पत्र जारी

युक्तियुक्तकरण के 6 माह बाद भी ज्वाइन नहीं करने वाले 9 शिक्षकों को आरोप पत्र जारी

बिलासपुर : युक्तियुक्तकरण के बाद अब तक नए जगहों में ज्वाइन नहीं करने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्यवाही शुरू की गई है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निर्देश पर ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार कर मूल पदस्थापना पर नहीं लौटने वाले नौ शिक्षकों को आरोप पत्र जारी किया गया है। शासन के आदेश के बावजूद ज्वाइन नहीं करने वाले 20 शिक्षकों की सूची तैयार की गई है इसमें वर्तमान में नौ शिक्षकों को आरोप पत्र जारी किया गया है और बाकी को आरोप पत्र जारी करने की तैयारी है।

शिक्षा विभाग में युक्तियुक्तकरण को लेकर चल रही खींचतान अब अनुशासनात्मक कार्रवाई तक पहुंच गई है। 11 दिसम्बर को शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बिलासपुर जिले की समीक्षा की थी। मंथन सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में युक्तियुक्तकरण की धीमी प्रक्रिया पर स्कूल शिक्षा मंत्री ने गहरी नाराजगी जताई थी। स्थिति इतनी तनावपूर्ण थी कि जिला शिक्षा अधिकारी विजय तांडे को कड़ी फटकार लगाई थी, वहीं कोटा के विकासखंड शिक्षा अधिकारी नरेंद्र मिश्रा दबाव के चलते बैठक के दौरान ही बेहोश हो गए थे। शिक्षामंत्री ने स्पष्ट आदेश दिया था कि जिले में युक्तियुक्तकरण के जितने भी मामले लंबित हैं, उनका तत्काल निराकरण किया जाए और जो शिक्षक अपने मूल पदस्थापना वाले स्कूलों को छोड़कर अन्य जगहों पर जमे हुए हैं, उन्हें वापस भेजा जाए। मंत्री के इस अल्टीमेटम के बाद जब विभाग ने बारीकी से जांच की, तो जिले के चार ब्लाकों में कुल 20 ऐसे शिक्षकों के मामले सामने आए जिन्होंने सरकारी आदेश के बावजूद अपनी मूल शाला में कार्यभार ग्रहण नहीं किया था। शासन के आदेश की खुली अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने पहले चरण में नौ शिक्षकों के खिलाफ आरोप पत्र जारी किए गए हैं।

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क्या है आरोप पत्र और क्यों होता है जारी

आरोप पत्र एक कानूनी दस्तावेज है, जो किसी कर्मचारी द्वारा नियमों के उल्लंघन या अनुशासनहीनता करने पर विभाग द्वारा जारी किया जाता है। इसमें कर्मचारी पर लगे आरोपों का विवरण होता है। यह तब जारी होता है जब कर्मचारी उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करता है या अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरतता है। इसके बाद कर्मचारी को अपना पक्ष रखना होता है, संतोषजनक जवाब न मिलने पर निलंबन या बर्खास्तगी जैसी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

जिन शिक्षकों को औपचारिक आरोप पत्र जारी किया गया है,ये सभी शिक्षक बिल्हा और मस्तूरी ब्लाक के प्राथमिक स्कूलों में पदस्थ हैं। विभाग का मानना है कि इन शिक्षकों की मनमानी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है और शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, कोटा और तखतपुर ब्लाक के शेष 11 शिक्षकों की सूची भी प्रक्रिया में है।

इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने कहा कि शासन के निर्देशों का अक्षरश:पालन करना हर कर्मचारी की जिम्मेदारी है। युक्तियुक्तकरण के तहत जिन शिक्षकों को मूल शाला में लौटने का आदेश दिया गया था, उन्होंने समय सीमा का पालन नहीं किया। आदेश की अवहेलना करने वाले नौ शिक्षकों को आरोप पत्र जारी किया गया है। शेष मामलों की भी समीक्षा की जा रही है।

इनको जारी किया गया आरोप पत्र

  1. राजकुमार रात्रे ,प्रा.शा. कर्रा लिमतरा (बिल्हा)
  2. शिवकुमार सारथी,प्रा. शा. हिरीं (मस्तूरी)
  3. उषा उपाध्याय,प्रा.शा. देवरी (मस्तूरी)
  4. अंजू शर्मा,प्रा.शा. प्रभात चौक (बिल्हा)
  5. मनीषा वर्मा,प्रा.शा. खमतराई (बिल्हा)
  6. आकांक्षा पांडे, प्रा.शा. इंदिरा नगर (बिल्हा)
  7. हर्षवर्धन सेंगर,प्रा.शा. मन्नाडोल (बिल्हा)
  8. संतोषी शर्मा, प्रा. शा. कुटीपारा (बिल्हा)
  9. श्वेता शर्मा प्रा.शा. नयापारा बोदरी (बिल्हा)










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