मध्य प्रदेश के किसान भाइयों के लिए जनवरी का महीना खेती के लिहाज से बेहद लाभकारी साबित हो सकता है. खासतौर पर इस समय पत्तेदार और मौसमी सब्जियों की खेती कम लागत में अच्छी आमदनी देने वाली मानी जाती है. अगर किसान नए साल की शुरुआत में खेत की सही तैयारी कर बीज बो दें या नर्सरी तैयार कर लें, तो होली तक फसल से अच्छी कमाई संभव है. कृषि क्षेत्र में 25 साल का अनुभव रखने वाले सीधी के किसान सलाहकार मनसुखलाल कुशवाहा ने बताया कि जनवरी में बोई गई कई सब्जियां 60 से 90 दिनों में तैयार हो जाती हैं. ऐसे में मार्च-अप्रैल के दौरान जब बाजार में इन सब्जियों की मांग बढ़ती है, किसानों को बेहतर दाम मिल सकते हैं. इस मौसम में गोभी, ब्रोकली, चुकंदर, मूली, गाजर, टमाटर, बैंगन, भिंडी, खीरा, ककड़ी, लौकी, पालक और मटर जैसी सब्जियों की खेती की जा सकती है.
मनसुख लाल कुशवाहा बताते हैं कि जनवरी से मार्च के बीच जायद फसलों की खेती बेहद फायदेमंद रहती है. इन फसलों को तैयार होने में ज्यादा समय नहीं लगता और बाजार में इनकी मांग लगातार बनी रहती है. उनके अनुसार भारत में सब्जियों की बुआई साल में तीन बार होती है, जनवरी, जून से अगस्त और नवंबर-दिसंबर में.
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खेती की सही विधि जरूरी
उन्होंने आगे कहा कि इन सब्जियों की अच्छी पैदावार के लिए खेत की भुरभुरी जुताई जरूरी है. जुताई के बाद खेत में गोबर की खाद डालकर पाटा चलाना चाहिए, जिससे खाद मिट्टी में अच्छी तरह मिल जाए. इसके बाद क्यारियां बनाकर कतारों में पौधों की रोपाई करें. पौधों के बीच कम से कम 6 इंच की दूरी रखें. किसान चाहें तो सीधे बीज बो सकते हैं या नर्सरी से तैयार पौधे लगा सकते हैं.
सिंचाई और खाद का रखें ध्यान
उन्होंने कहा कि अगर ड्रिप इरिगेशन का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो खाद और पानी तरल रूप में देना बेहतर रहता है. बुवाई के 30 से 40 दिन बाद एक बार खाद देना पर्याप्त होता है. सिंचाई में जलभराव से बचें. सामान्य तौर पर हफ्ते में तीन बार सिंचाई काफी होती है लेकिन मिट्टी की नमी के अनुसार इसे बढ़ाया भी जा सकता है.
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
उन्होंने आगे कहा कि जनवरी में खेती करते समय पंक्तिवार बुआई करें. समय-समय पर उर्वरक और पोषक तत्वों का छिड़काव करें और खरपतवार नियंत्रण पर ध्यान दें. सही देखभाल से किसान कम समय में अच्छी गुणवत्ता की फसल प्राप्त कर सकते हैं.

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