वाशिंगटन : इजरायल और हमास के बीच युद्ध समाप्त होने के बाद अमेरिकी अगुआई में गाजा अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स-आइएसएफ) में पाकिस्तान की संभावित भागीदारी हमास के सैन्य ढांचे को खत्म करने के प्रयासों को कमजोर कर सकती है।
एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि गाजा को स्थिर करने और हमास को खत्म करने के लिए डिजायन किए गए इस मिशन में पाकिस्तान को सुरक्षा जिम्मेदारियां सौंपना हमास के अस्तित्व के लिए वरदान साबित हो सकता है क्योंकि पाकिस्तान खुलकर इस आतंकी समूह को वैधता प्रदान करता है।
न्यूयॉर्क स्थित थिंक टैंक गेटस्टोन इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में बताया गया है, ''इजरायली अधिकारियों की रिपोर्ट कहती है कि तीन देशों ने युद्ध के बाद गाजा इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स में भागीदारी के वाशिंगटन के अनुरोध पर सहमति व्यक्त की है। तीनों देशों की पहचान उजागर नहीं की गई है, हालांकि इंडोनेशिया उनमें से एक हो सकता है। पहले की रिपोर्टों में पाकिस्तान की भी आइएसएफ में संभावित योगदानकर्ता के रूप में पहचान की गई थी।''
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रिपोर्ट में कहा गया है, ''पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर इजरायल को मान्यता नहीं देता है और उसने कभी भी हमास को आतंकी संगठन घोषित नहीं किया है। संभव है कि उसकी यह सुनिश्चित करने में दिलचस्पी हो कि हमास अपना प्रतिरोध यानी आतंकवाद जारी रख सके।''
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आइएसआइ पर लंबे समय से इस्लामी आतंकी संगठनों के साथ संबंध रखने का आरोप लगता रहा है। दशकों से आइएसआइ पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे समूहों को बढ़ावा देती रही है, जिनकी विचारधाराएं हमास से काफी मिलती-जुलती हैं। ऐसे संबंध युद्ध के बाद गाजा की स्थिति में हमास का मुकाबला करने की पाकिस्तान की क्षमता पर संदेह पैदा करते हैं।
रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि सात अक्टूबर, 2023 के नरसंहार के बाद से हमास के प्रति पाकिस्तान का रुख प्रोत्साहित करने वाला हो गया है। हमास के प्रतिनिधियों को पाकिस्तान की धरती पर स्वतंत्र रूप से काम करने, सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेने और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों के साथ गठबंधन की अनुमति दी गई है।
ऐसा रुख हमास को अलग-थलग करने के पश्चिमी प्रयासों को सीधे तौर पर कमजोर करता है और यह सवाल उठाता है कि क्या अमेरिका को पाकिस्तान को प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी मानना जारी रखना चाहिए। रिपोर्ट में पाकिस्तान से जुड़े एक और बड़े खतरे, खासकर खुफिया जानकारी लीक होने पर भी जोर दिया गया है।
कहा गया है, ''गाजा में तैनाती पर पाकिस्तानी यूनिट्स सहयोग की आड़ में हमास या उसके क्षेत्रीय समर्थकों को चुपचाप संवेदनशील जानकारी दे सकती हैं। पहले भी ऐसी रिपोर्टें आई हैं जिनमें आइएसआइ पर दक्षिण एशिया में हमास की पहुंच को आसान बनाने में शामिल होने का आरोप लगाया गया है, जिसमें बांग्लादेश और गुलाम जम्मू-कश्मीर का दौरा करके जिहादी नेटवर्क को मजबूत करना शामिल है।''

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