रायपुर : प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री औऱ वरिष्ठ भाजपा नेता ननकी राम कंवर ने पीएमओ के प्रधान सचिव पीके मिश्रा को लिखे शिकायत पत्र में जीएसटी चोरी में दवा कंपनियों और अधिकारियों की भूमिका की जांच करने करने की मांग की है। कंवर ने पीएमओ प्रधानसचिव मिश्रा को प्रदेश की हालात और मंत्रालय से लेकर संत्रालय तक चल रहे जीएसटी विभाग और ड्रग कंट्रोलर विभाग औऱ बड़ा औऱ नामचीन दवा कंपनियों की मिली भगत से छत्तीसगढ़ में एक सिंडिकेट सरकार को हानि पहुंचाने का खेल खेल रहा है। इस मामले में केंद्र सरकार हस्तक्षेप कर जांच कराए तो अरबों रुपए के घपले उजागर हो सकते है। जिसमें बड़े -बड़े अधिकारियों को प्रलोभन देकर बड़ा दवा कंपनियां कैसे नकली दवा को असली दाम में बेचकर जीएसटी का चोरी कर देश के राजस्व को नुकसान पहुंचा रही है।
कंवर ने मिश्रा जी को संबोधित करते लिखा कि 23/जन/25 छत्तीसगढ़ प्रदेश के जी.एस.टी. विभाग एवं ड्रग कंट्रोल रायपुर के द्वारा दवा क पनियों से मिलकर राज्य को आर्थिक हानि पहुचाया जा रहा है जिसमें विभिन्न संस्थाओं के नाम पर फर्जी दवाईयों का आर्डर (हॉस्पिटल सप्लाई) बनाकर रियायत दर पर क पनी से दवा लेकर खुले बाजार में दवाओं को बेचकर लगभग 1000 करोड़ से ज्यादा की जी.एस.टी. एवं आयकर चोरी के स बन्ध में दवा कपनियों एवं अन्य के विरुद्ध अपराधिक मामला दर्ज कर कार्यवाही करने बाबत।
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उपरोक्त विषयांतर्गत लेख है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश के जी.एस.टी. विभाग, ड्रग कंट्रोल आफिस दवा क पनियों एवं व्यापारियो से मिलकर राज्य को कई 1000 करोड़ की आर्थिक क्षति अपने निजी लाभ प्राप्त करने हेतु किया जा रहा है छत्तीसगढ़ में स्थित सार्वजनिक उपक्रम एवं प्रायवेट कारखानों के अस्पतालों के नाम पर दवा क पनियों के द्वारा फर्जी क्रय आदेश बनाकर रियायत दर पर क पनियों से दवा लेकर खुले बाजार में बेचा जा रहा है, जो उपक्रम नि नानुसार हैं- बालको हॉस्पिटल, बालको एवं रायपुर, एन.टी.पी.सी. हॉस्पिटल, सभी संस्थाएं जो छत्तीसगढ़ में स्थित है, एस.ई.सी.एल. के समस्त हॉस्पिटल, भिलाई स्टील प्लांट के हॉस्पिटल, सी. एस. ई.बी. के समस्त हॉस्पिटल, श्रम विभाग के अन्तर्गत आने वाले ई.एस.आई.सी. के समस्त हॉस्पिटल, एन.एम.डी.सी. की हॉस्पिटल, जिन्दल हॉस्पिटल, लैंकों हॉस्पिटल, एवं राज्य में स्थित अन्य अस्पतालों के नाम पर दवा क पनियों के द्वारा हॉस्पिटल सप्लाई करना है, यह कहकर उदाहरण के तौर पर 100 /- रूपये की दवाई को 30 या 40 /- रूपये में कपनी से उपरोक्त संस्थानों के नाम पर फर्जी क्रय आदेश बनाकर निकाला जा रहा है, और उसे खुले बाजार में 70 या 80/- रू. में बिना बिल के बेच दिया जाता है। इस तरह की कार्यवाही कई वर्षों से पूरे प्रदेश में चल रही है।
जिसमें हर वर्ष 1000 करोड़ से 1200 करोड़ के दवाईयों का फर्जी ऑर्डर बनाकर दवाईयां रियायत दर पर क पनियों से निकाली जा रही है और उसे खुले मार्केट में बेच दिया जा रहा है इस तरह की कार्यवाही में बड़ी-बड़ी क पनियां शामिल हैं, जो कि निनानुसार है - एबोट इंडिया लिमिटेड, बायोकॉन, रैनबेक्सी, मेनकाईनड, शीपला लिमिटेड, सनफर्मा, डॉ. रेड्डी लेबोटरी, एलकेम लेबोटरी, टोरेन्ट फर्मासिटिकल, शेरम इन्स्टीट्यूट, जायडस, हिमालया ड्रग बैंगलोर इसी प्रकार संलग्न सूची में दिए गए सभी क पनियां फर्जी हॉस्पिटल सप्लाई के नाम से क्रय आदेश निकालकर कई हजार करोड़ की जीएसटी एवं इंन्कम टेक्स की चोरी कर रहे है ।
इनके द्वारा उपरोक्त अस्पतालों के नाम पर उनके बजट से कई सौ गुनह अधिक दवा क पनियों से रियायत दर पर दवाई निकालकर खुले बाजार में बेचा जा रहा है । इस तरह से करीब 1000 करोड़ से भी ज्यादा की के जीएसटी एवं आयकर टैक्स चोरी की जा चुकी है।
अत: आपसे अपेक्षा है कि जी.एस.टी. विभाग, ड्रग कंट्रोल आफिस के द्वारा दवा कंपनियों एवं व्यापारियों से मिलकर अपने निजी लाभ लेने की नियत से प्रदेश में 1000 करोड की आर्थिक क्षति पहुंचाई जा रही है जो कि बहुत बड़ा आर्थिक क्षति से जुड़ा हुआ मामला है। शासकीय एवं निजी अस्पतालों के बजट से सौ गुना अधिक की रियायती दर पर दवाईयों फर्जी तरीके से दवाईयों का आर्डर बनाकर खुले बाजार मे बिना बिल के बेचा जा रहा है जिससे सरकार को लगभग 1000 करोड रूपये की आर्थिक क्षति हो रही है इस संबंध में संबंधीत अधिकारी कर्मचारी दवा कंपनी व डिलरो के विरूद्ध अपराधिक मामला दर्ज करते हुए पैसे की वसूली करने एवं कार्यवाही करने हेतु निर्देश देना चाहेंगे ।

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