धूमधाम से मनाया गया लोक पर्व छेरछेरा

धूमधाम से मनाया गया लोक पर्व छेरछेरा

सरगुजा : सदियों पुरानी परंपरा को कायम रखते हुए नगर लखनपुर सहित आसपास ग्रामीण इलाकों में लोक संस्कृति का पर्व छेरछेरा 3 जनवरी दिन शनिवार को उत्साह उमंग के साथ मनाया गया। बच्चों ने टोली बनाकर सुबह से घर घर जाकर ""छेरछेरा कोठी के धान हेरहेरा"" कहते हुए छेरता मांगे मुहल्ले बस्ती के लोगों ने बच्चों को धान चावल पैसा दान स्वरूप देकर संतुष्ट किये। दरअसल यह त्योहार किसान वर्ग के लोग खेतों में अच्छी पैदावार होने के बाद नई फसल काट कर लाने के खुशी में मनाते हैं । अच्छी उपज होने से किसानों के दिलों दिमाग में एक खुशी की उन्माद होती है। आपसी समरसता प्रेम भाईचारे को बनाये रखने छेरछेरा त्योहार मनाकर खुशियां बांटते है। कृषि कार्य में लगे किसान अपनी थकान को कुछ पलों के लिए छेरछेरा त्योहार के पनाह में भूल जाना चाहता है। खुशी एवं अपनेपन को एक-दूसरे के साथ साझा करना चाहते है । छेरछेरा त्योहार शायद इसी का नतीजा है । यदि देखा जाए तो किसी भी त्योहार के पीछे एक कहानी जुड़ी होती है । पर्व त्योहार का अपना इतिहास होता है।

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छेरछेरा त्योहार प्रत्येक वर्ष पौष मास के शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। प्रत्येक्ष अथवा परोक्षरूप में इस त्योहार से कुछ सामाजिक रितिया जुड़ी हुई है। जैसे पहले जमाने में बंधुआ मजदूरो का एक साल पूरा हो जाने पर किसान का काम छेरछेरा से पूरा होना माना जाता था ।छेरछेरा त्योहार के बाद से नये सत्र के लिए काम की शुरूआत होती थी । लोहार, नाई, गाय बैल चराने वाले गयार कोटवार अन्य दूसरे तरह की सामाजिक कार्यकर्ताओं का समय सीमा छेरछेरा त्योहार पर आकर खत्म हो जाती थी। फिर से काम की आरंभ छेरता से माना जाता था। कालांतर में इसका स्वरूप बदला है कहीं कहीं पुरानी परम्परा आज भी चलन में है।

त्योंहारों की श्रृंखला में छेरछेरा का महत्व पूर्ण स्थान रहा है। यह बच्चों का मूल त्योहार माना जाता है। छेरछेरा त्योहार के मौके पर बड़े बुजुर्ग बच्चे सभी ने छेरता मांगा । ढोल ढमाके के साथ शाम ढलते ही ढोल ढमाके के साथ घर घर जाकर पारम्परिक लोकडी नृत्य करते हुए लोकडी मांगे। लोगों ने लोकडी नृत्य करने वाले बच्चे बच्चियों बुजुर्गवारो को धान चावल पैसे आदी का दान किया।

छेरछेरा को अन्न दान का महापर्व माना जाता है। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रो में कच्ची महुआ शराब पीने पिलाने तथा बकरा, मुर्गा, पकवान खाने खिलाने का दौर चलता है जिसे लोगों ने बखूबी निभाया। इसे प्रकृति पूजा से जोड़ कर देखा जाता है छेरछरा में नये धान के चावल से बनी चुडा तथा नये ईख से बने गुड खाना श्रेयष्कर माना जाता है। छेरता के मौके पर लोगों ने एक-दूसरे को गुड़ छुड़ा तथा पकवान खिला कर त्योहार की खुशियां बांटें । क्षेत्र में चारों तरफ छेरछेरा त्योहार धूमधाम से मनाया गया।।










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