कब है सकट चौथ ? संतान की लंबी उम्र के लिए पूजा में जरूर शामिल करें ये चीजें

कब है सकट चौथ ? संतान की लंबी उम्र के लिए पूजा में जरूर शामिल करें ये चीजें

सकट चौथ का पर्व गणपति बप्पा को समर्पित है। इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है और विशेष चीजों का दान किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सकट चौथ के दिन विधिपूर्वक व्रत करने से संतान को दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

सकट चौथ 2026 डेट और शुभ मुहूर्त 
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 06 जनवरी को सुबह 08 बजकर 01 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 07 जनवरी को सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर होगा। ऐसे में सकट चौथ का व्रत 06 जनवरी (Sakat Chauth 2026 Kab Hai) को किया जाएगा।

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सकट चौथ पूजा सामग्री लिस्ट 

  1. जल
  2. सुपारी
  3. जनेऊ
  4. लौंग
  5. चौकी
  6. फूल
  7. गंगाजल
  8. देसी घी
  9. तिल के लड्डू
  10. फल
  11. कलश
  12. दीपक
  13. दूध
  14. मोदक
  15. धूप
  16. गणेश जी की प्रतिमा

सकट चौथ के दिन क्या करें

  1. सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें।
  2. विधिपूर्वक गणपति बप्पा की पूजा करें।
  3. सकट चौथ व्रत कथा का पाठ करें।
  4. तिल के लड्डू का भोग लगाएं।
  5. मंदिर या गरीब लोगों में तिल, अन्न और धन समेत आदि चीजों का दान करें।
  6. रात में चंद्र दर्शन करने बाद भोजन करें।

जरूर करें ये उपाय

  • आर्थिक तंगी से मुक्ति पाने के लिए सकट चौथ के दिन पूजा के समय गणपति बप्पा को घी और गुड़ का भोग लगाएं। प्रसाद को ग्रहण करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है और भगवान गणेश के आशीर्वाद से बिगड़े काम पूरे होते हैं।
  • सकट चौथ के दिन गणपति बप्पा को दूर्वा को जरूर अर्पित करें। इस दौरान प्रभु से जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से साधक की सभी मुरादें पूरी होती हैं।

गणेश मंत्र

1. ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।

निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥

2. ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्

3. 'गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।

नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।।

धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।

गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।







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