नई दिल्ली : बंगाली अस्मिता के ममता बनर्जी के पिच पर अमित शाह भाजपा की बैटिंग सजाने की कोशिश में जुटे हैं। बंगाली अस्मिता के इसी नारे के सहारे ममता बनर्जी भाजपा का पश्चिम बंगाल में अब तक रोकने में सफल रही थी। इसी पर हमला करते हुए अमित शाह ने साफ किया कि ममता बनर्जी के शासन में पश्चिम बंगाल की मां, माटी और मानुष तीनों खतरे में है और सिर्फ भाजपा ही इसे सुरक्षित कर सकती है। जाहिर है अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का प्रचार अभियान इसी के इर्दगिर्द केंद्रित हो सकता है। वैसे ममता बनर्जी की पिच पर भाजपा के सियासी बल्लेबाज कैसे बैटिंग कर पाते हैं, यह चुनाव परिणाम से ही साफ होगा।
दरअसल, 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान ममता बनर्जी का पूरा चुनाव अभियान बंगाली अस्मिता पर केंद्रित था। गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजराती मूल से जोड़ते हुए ममता बनर्जी ने पूरी भाजपा को बाहरी लोगों की पार्टी घोषित कर दिया था। बंगाली अस्मिता का उनका यह दांव सफल रहा और तृणमूल कांग्रेस 294 में से 215 सीटें जीतने में सफल रही। वहीं भाजपा अप्रत्याशित प्रदर्शन के बावजूद 77 सीटों पर सिमट गई।
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भाजपा 2021 में मूलरूप से हर काम के लिए तृणमूल नेताओं व कार्यकर्ताओं द्वारा वसूले जाने वाले कटमनी, भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था को मुद्दा बनाया था। 2021 के अनुभवों के सीख लेते हुए अमित शाह ने इस बार पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या को केंद्रीय चुनावी मुद्दा बनाने का संकेत दिया है।
अमित शाह के प्रेस कांफ्रेंस में इसे साफ तौर पर देखा जा सकता है। भाजपा कोर कमेटी के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में शाह ने साफ किया किया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों से पश्चिम बंगाल की मां, माटी और मानुष तीनों को खतरा है। शाह ने बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ के लिए सीधे तौर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया।
ममता बनर्जी सीमा पर बीएसएफ की तैनाती का हवाला देकर इसे रोक पाने में विफलता के लिए गृह मंत्री के रूप में अमित शाह को जिम्मेदार ठहराती रही है। वहीं शाह ने सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन नहीं देने के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया। एक कदम आगे बढ़ते हुए शाह ने कहा कि एक बार घुसपैठ करने के बाद ममता बनर्जी की सरकार वोटबैंक के लिए उन्हें संरक्षण देती है।
अमित शाह की चाल की काट के लिए ममता बनर्जी ने भाजपा शासित राज्यों में बांग्लाभाषियों को निशाना बनाने को बड़ा मुद्दा बनाने का संकेत दिया है। उन्होंने अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ कई राज्यों में चल अभियान को बांग्ला भाषियों से जोड़ दिया है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में पूरी तरह से हाशिये पर आ गई कांग्रेस और सीपीएम भी इस मुद्दे पर ममता बनर्जी के साथ है।
पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर बांग्ला भाषियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। जाहिर है बंगाली अस्मिता की सुरक्षा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का केंद्रीय मुद्दा बनने जा रहा है।
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