अमेठी जिले में खेती-किसानी को बेहतर बनाने के लिए किसान लगातार नए-नए प्रयोग कर रहे हैं. लेकिन फसलों में खरपतवार और शत्रु कीट किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं. गेहूं, चना और मटर जैसी रबी फसलों में खरपतवार और कीटों के कारण उत्पादन प्रभावित होता है. ऐसे में कृषि विभाग ने किसानों की इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने का दावा किया है और उन्हें दवा के साथ-साथ देसी उपाय अपनाने की सलाह दी है.
खरपतवार और कीट बने किसानों की परेशानी
गेहूं की बुवाई के बाद किसानों के सामने खरपतवार और कीटों का प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है. चौड़ी पत्ती और संकरी पत्ती वाले खरपतवार फसलों के पोषक तत्वों को खत्म कर देते हैं. इसके साथ ही कीट फसलों को नुकसान पहुंचाकर पैदावार घटा देते हैं. यही वजह है कि अमेठी जिले के किसान इस समस्या को लेकर काफी परेशान नजर आ रहे हैं.
कृषि विभाग ने बताया शत प्रतिशत समाधान
किसानों की परेशानी को देखते हुए कृषि विभाग ने दावा किया है कि खरपतवार और कीटों का शत प्रतिशत समाधान संभव है. विभाग का कहना है कि सही समय पर सही दवा और उपाय अपनाकर फसलों को सुरक्षित किया जा सकता है. इसके लिए कृषि अधिकारी लगातार किसानों से संपर्क कर उन्हें जागरूक कर रहे हैं.
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खरपतवार नियंत्रण के लिए दवा का सही उपयोग
जिला कृषि अधिकारी राजेश कुमार यादव ने बताया कि गेहूं की फसल में अक्सर चौड़ी पत्ती और संकरी पत्ती वाले खरपतवार एक साथ उग आते हैं. ऐसे में किसान सल्फोसल्फ्यूरान दवा को 150 से 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव कर सकते हैं. इससे खरपतवार पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है.
अधिक खरपतवार में मिश्रण होगा कारगर
उन्होंने बताया कि यदि खेत में खरपतवार की मात्रा अधिक हो, तो सल्फोसल्फ्यूरान के साथ मेटसल्फ्यूरान मिथाइल का मिश्रण प्रयोग करना ज्यादा फायदेमंद रहता है. यह मिश्रण चौड़ी और संकरी दोनों तरह की पत्तियों वाले खरपतवार को नष्ट करने में कारगर है. इससे फसल की बढ़वार बेहतर होती है और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है.
देसी उपाय भी हैं बेहद असरदार
कृषि अधिकारी ने रासायनिक दवाओं के साथ-साथ देसी और जैविक उपाय अपनाने पर भी जोर दिया है. उन्होंने बताया कि कीट नियंत्रण के लिए नीम का घोल, नीम का तेल या नीम की पत्तियों का घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है. इससे कीटों का प्राकृतिक रूप से सफाया होता है और फसल सुरक्षित रहती है.
छाछ और बेसन का देसी नुस्खा
उन्होंने किसानों को छाछ और बेसन के मिश्रण का प्रयोग करने की भी सलाह दी. छाछ और बेसन को पानी में मिलाकर स्प्रे करने से फसल को पोषण मिलता है और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. यह उपाय सस्ता, सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है.
मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने की सलाह
जिला कृषि अधिकारी ने किसानों को खेत में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद का प्रयोग करने की सलाह दी. इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और फसल को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं. जैविक खाद के इस्तेमाल से लंबे समय तक भूमि की गुणवत्ता बेहतर रहती है.
अधिकारी बोले, किसान न हों परेशान
जिला कृषि अधिकारी राजेश कुमार यादव ने किसानों को आश्वस्त किया कि खरपतवार या कीट लगने पर घबराने की जरूरत नहीं है. जिला स्तर पर कृषि विभाग के अधिकारी चिन्हित किए गए हैं, जो खेतों में जाकर किसानों की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं. सही सलाह और उपाय अपनाकर किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर पैदावार हासिल कर सकते हैं.
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