बेमेतरा टेकेश्वर दुबे : जिला बेमेतरा के ग्राम मानपुर के किसानों ने इस वर्ष खेती के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी निर्णय लेते हुए ग्रीष्मकालीन धान की खेती को छोड़कर दलहन, तिलहन एवं अन्य वैकल्पिक फसलों को अपनाया है। यह परिवर्तन न केवल किसानों की सोच में आए सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है, बल्कि जल संरक्षण, लागत में कमी एवं टिकाऊ कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। पिछले वर्ष ग्राम मानपुर में लगभग 100 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन धान की खेती की गई थी, जिसमें अत्यधिक मात्रा में पानी, बिजली और कृषि लागत की आवश्यकता होती थी। गिरते भू-जल स्तर, बढ़ती सिंचाई लागत तथा जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष किसानों ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में धान के स्थान पर चना, गेहूँ, सरसों एवं अन्य कम पानी वाली फसलों की खेती का निर्णय लिया।
जल संरक्षण और लागत में उल्लेखनीय कमी
ग्रीष्मकालीन धान की तुलना में वैकल्पिक फसलों में 60 से 70 प्रतिशत तक कम पानी की आवश्यकता होती है। इससे न केवल जल संसाधनों का संरक्षण हुआ है, बल्कि किसानों के बिजली, सिंचाई, बीज एवं उर्वरक खर्च में भी उल्लेखनीय कमी आई है। कम लागत में खेती होने से किसानों को बेहतर शुद्ध लाभ मिलने की उम्मीद है।
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मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा
दलहनी फसलों की खेती से भूमि की उर्वरता बनाए रखने में सहायता मिलती है, क्योंकि ये फसलें प्राकृतिक रूप से मिट्टी में नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करती हैं। इससे दीर्घकाल में भूमि की उत्पादक क्षमता बढ़ेगी और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी कम होगी। यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
किसानों की सोच में सकारात्मक परिवर्तन
ग्राम मानपुर के किसानों का कहना है कि पहले ग्रीष्मकालीन धान की खेती परंपरा के कारण की जाती थी, लेकिन अब वे लाभकारी, टिकाऊ एवं संसाधन-संरक्षण आधारित खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस बदलाव से किसानों में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे भविष्य में भी वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित हुए हैं।
अन्य गांवों के लिए प्रेरणास्रोत
ग्राम मानपुर की यह पहल जिले के अन्य गांवों के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सही मार्गदर्शन, जागरूकता और सामूहिक प्रयास से खेती को अधिक लाभकारी एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाया जा सकता है। ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहन-तिलहन एवं वैकल्पिक फसलों को अपनाकर ग्राम मानपुर के किसानों ने सतत कृषि की दिशा में एक अनुकरणीय पहल की है। यह प्रयास न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेगा, बल्कि आने वाले समय में जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह कहानी निश्चित रूप से जिले एवं राज्य के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।
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