पूजा में ना इस्तेमाल करें ये बासी सामग्री,वरना रूठ सकते हैं आपके ईष्ट देव

पूजा में ना इस्तेमाल करें ये बासी सामग्री,वरना रूठ सकते हैं आपके ईष्ट देव

अक्सर घर में पूजा-पाठ के दौरान हमारे मन में यह सवाल आता है कि क्या बची हुई सामग्री या अर्पित की गई चीजों का दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है? कई बार हम अनजाने में ऐसी गलतियां कर देते हैं, जो शास्त्रों के अनुसार वर्जित हैं। 'शुद्धता' और 'पवित्रता' हिंदू धर्म में पूजा के दो सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं। शास्त्रों में पूजा सामग्री के पुन: उपयोग (Reuse) से जुड़े 3 कड़े नियम दिए गए हैं, जिन्हें हर भक्त को जानना चाहिए:

1. एक बार अर्पित सामग्री को दोबारा नहीं

शास्त्रों में 'निर्माल्य' उस सामग्री को कहा जाता है जो एक बार भगवान को अर्पित की जा चुकी हो। नियम यह है कि एक बार जो फूल, माला या अक्षत (चावल) भगवान को चढ़ा दिए गए, वे अब उनके प्रसाद का हिस्सा बन गए हैं। उन्हें दोबारा धोकर या साफ करके दूसरी पूजा में इस्तेमाल करना 'अशुद्ध' माना जाता है। ऐसा करने से पूजा का फल नहीं मिलता और दोष लगता है।

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2. जल और पात्र की शुद्धता
पूजा में इस्तेमाल होने वाला जल हमेशा ताजा होना चाहिए। अगर आपने कलश में जल भरकर रखा है और वह किसी कारणवश अशुद्ध स्पर्श में आया है, तो उसे दोबारा पूजा में उपयोग न करें। इसी तरह, तांबे या पीतल के बर्तनों को हर पूजा के बाद शुद्ध मिट्टी या नींबू से साफ करना अनिवार्य है। पुराने दीये की बत्ती या बचा हुआ तेल हटाकर ही नया दीपक जलाना चाहिए। बासी तेल या जली हुई बत्ती का दोबारा प्रयोग नकारात्मकता लाता है।

3. कुछ अपवाद (जो दोबारा उपयोग हो सकते हैं)
हर नियम के कुछ अपवाद भी होते हैं। शास्त्रों के अनुसार, कुछ विशेष चीजें ऐसी हैं जिन्हें शुद्ध मानकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है:

गंगाजल: गंगाजल कभी बासी नहीं होता, इसे आप बार-बार इस्तेमाल कर सकते हैं।

तुलसी दल: विशेष परिस्थितियों में तुलसी के पत्तों को धोकर दोबारा भगवान को अर्पित किया जा सकता है।

मूर्तियां और शालिग्राम: इनका अभिषेक बार-बार किया जाता है, लेकिन शुद्ध जल और पंचामृत से स्नान कराने के बाद।

धातु के सिक्के/कलश: इन्हें धोकर दोबारा नई पूजा में स्थापित किया जा सकता है।

पूजा सामग्री का सम्मान करना ईश्वर का सम्मान करने के बराबर है। जो चीजें एक बार उपयोग हो चुकी हैं, उन्हें पवित्र नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए या किसी पेड़ (जैसे पीपल या बरगद) की जड़ में डाल देना चाहिए। श्रद्धा के साथ-साथ नियमों का पालन ही आपकी प्रार्थना को सफल बनाता है।








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