गरियाबंद : गरियाबंद में शिक्षा विभाग एक बार फिर सुर्खियों में है। मामला नवीन सैनिक स्कूल का है, इसको लेकर पहले भाजपा नेताओं ने जिला शिक्षा अधिकारी की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए थे, अब कांग्रेस भी सड़क पर उतर गई है। जिससे कि गरियाबंद की राजनीति गरमा गई है। जिले में स्वीकृत सैनिक स्कूल को जिला मुख्यालय से बाहर ले जाने और गलत जानकारी शासन को भेजने पर भाजपा के बाद अब कांग्रेस के निशाने पर जिला शिक्षा अधिकारी हैं। कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को तिरंगा चौक पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए डीईओ का पुतला दहन कर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी -पक्ष -विपक्ष मस्त,छत्तीसगढ़िया पस्त है
मालूम हो कि गरियाबंद में सैनिक स्कूल खोले जाने के मुद्दे पर दो दिन पहले वरिष्ठ भाजपा नेता मुरलीधर सिन्हा ने डीईओ के कार्यशैली पर सवाल उठाया था और कड़े शब्दों में निंदा की थी। अब कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि नवीन सैनिक स्कूल के लिए जिले के पांचों अनुविभागों से उपयुक्त भूमि की जानकारी मंगाई जानी थी, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी किए बिना ही एकतरफा और संदिग्ध तरीके से स्थल चयन का फैसला लिया गया। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आखिर किसके इशारे पर यह निर्णय लिया गया और इसे पारदर्शिता के खिलाफ बताते हुए बड़ी साजिश की आशंका जताई है। हालांकि, भाजपा नेता के बयान के बाद डीईओ जगजीत सिंह धीर ने जिले के पांच अनुविभाग के एसडीएम को पत्र लिखकर सैनिक स्कूल के लिए आवश्यक 70 एकड़ भूमि की मांग रखी है। यह भी कहा है कि जहां उपयुक्त भूखंड मिलेंगे, वहां अब सैनिक स्कूल निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।
प्रशासनिक कसावट में कमी
जिले में पिछले 4 माह से प्रशासनिक कसावट की कमी देखी जा रही है।कांग्रेस का आरोप है कि प्रशासनिक कसावट के अभाव में विभाग अध्यक्ष मनमानी कर रहे है। निर्माण कार्य, सप्लाई हो या फिर हितग्राही मूलक योजनाएं, सभी में लगातार खामियां उजागर हो रही है।
.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)

Comments