रायगढ़ रिश्वत कांड मामलें में बड़ा ट्विस्ट,जिस जमीन के लिए घुस मांगी, वह सरकारी

रायगढ़ रिश्वत कांड मामलें में बड़ा ट्विस्ट,जिस जमीन के लिए घुस मांगी, वह सरकारी

रायगढ़ :  धरमजयगढ़ में एंटी करप्शन ब्यूरो ने एसडीएम कार्यालय के बाबू को एक लाख रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। इस मामले में बहुत बड़ा ट्विस्ट आ गया है। जिस मामले को दबाने के लिए रिश्वत मांगी जा रही थी, वह भी एक बड़े अपराध से जुड़ी है। जिस जमीन का नामांतरण शिकायतकर्ता के नाम पर किया गया था, वह सरकारी जमीन है। यह केस अब सिर के बल उलट गया है। पिछले शुक्रवार को आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने ट्रैप अभियान के तहत धरमजयगढ़ में एसडीएम कार्यालय के बाबू अनिल कुमार चेलक को एक ग्रामीण राजू कुमार यादव से 1 लाख रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा है। ग्राम अमलीटिकरा तहसील धर्मजयगढ़ निवासी राजू कुमार यादव ने एसीबी से शिकायत की थी कि उसने अमलीटिकरा में एक जमीन क्रय की थी। रजिस्ट्री के बाद नामांतरण भी हो चुका है। बाबू अनिल कुमार चेलक ने उससे कहा कि जमीन की गलत तरीके से रजिस्ट्री हुई है।

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इस संबंध में विक्रेता और राजू के विरुद्ध एक शिकायत हुई है। उस शिकायत को दबाने के लिए उसने दो लाख रुपए की मांग की थी जिसमें से एक लाख रुपए देते समय रंगे हाथ एसीबी के हत्थे चढ़ गया। इस प्रकरण में सबसे अहम वह जमीन है जिसकी रजिस्ट्री राजू के नाम पर हुई है। दरअसल 17 जनवरी 2025 को राजू यादव ने फूलेश्वरी पिता मानिकदास निवासी अमृतपुर से पांच खसरा नंबरों की जमीन खरीदी थी। खनं 348/2 रकबा 0.1210 हे., खनं 349/2 रकबा 0.1620 हे., खनं 334 रकबा 0.2600 हे., खनं 355/2 रकबा 0.3820 हे. और 357/2 रकबा 0.3870 हे. कुल 1.312 हे. की रजिस्ट्री राजू के नाम पर हुई। इसके पहले जमीन फुलेश्वरी के नाम पर कैसे आई, इसकी जांच जरूरी है। मिली जानकारी के मुताबिक हल्का पटवारी ने करीब 2001 में उक्त सरकारी जमीन पर फुलेश्वरी का नाम चढ़ाकर रिकॉर्ड अपडेट कर दिया। इसके बाद अब जमीन को राजू ने खरीद लिया।

भोजकुमार ने किया नामांतरण

17 जनवरी 2025 को रजिस्ट्री के बाद तत्कालीन तहसीलदार भोजकुमार डहरिया ने नामांतरण के लिए नोटिस जारी किया। कोई आपत्ति नहीं आई तो राजू यादव के नाम पर नामांतरण आदेश कर दिया। किसी ने इस जमीन में हुई गड़बड़ी की शिकायत कर दी। उसी शिकायत को दबाने के लिए बाबू अनिल कुमार चेलक ने दो लाख रुपए की मांग की थी। हैरानी की बात यह है कि इतना बड़ा कांड हो गया लेकिन किसी को कानोंकान भनक तक नहीं लगी।

एफआईआर दर्ज होनी थी

कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी रायगढ़ जिले में राजस्व विभाग की कार्यशैली में सुधार लाने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन ऐसे मामले उनकी मेहनत को पलीता लगा रहे हैं। इस मामले में नामांतरण के समय ही तहसीलदार को परीक्षण करना था। जनवरी में रजिस्ट्री के बाद हल्का पटवारी को सारी जानकारी होने के बावजूद उसने सतर्क नहीं किया। यह गड़बड़ी वहीं रुक सकती थी। इसके बाद जब शिकायत आई तो बाबू के मन में लालच आ गया। उसने अपने अधिकारी को विस्तृत जानकारी देने के बजाय खुद ही डील करने का प्रयास किया। इस मामले में अब तक संबंधितों पर कूटरचना की एफआईआर दर्ज होनी थी।










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