दंतेवाड़ा : छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में शांति और पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। ‘पूना मारगेम’ (पुनर्वास से पुनर्जीवन) अभियान के तहत आज 63 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया। इनमें 18 महिलाएं और 45 पुरुष शामिल हैं। इनमें से 36 कैडर ऐसे हैं जिन पर कुल 1 करोड़ 19 लाख 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। इनामी माओवादियों में शामिल हैं:
8 लाख रुपये के 7 कैडर
5 लाख रुपये के 7 कैडर
2 लाख रुपये के 8 कैडर
1 लाख रुपये के 11 कैडर
50 हजार रुपये के 3 कैडर
ये आत्मसमर्पित माओवादी दरभा डिवीजन, दक्षिण बस्तर, पश्चिम बस्तर, माड़ क्षेत्र तथा पड़ोसी ओडिशा राज्य के कुछ हिस्सों में सक्रिय थे। उनमें कई उच्च पद वाले कैडर शामिल हैं, जैसे डीवीसीएम (डिवीजनल कमिटी सदस्य), पीपीसीएम (प्लाटून पार्टी कमिटी सदस्य), एरिया कमिटी सचिव, मिलिशिया कमांडर आदि।
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आत्मसमर्पण समारोह दंतेवाड़ा के डीआरजी कार्यालय में आयोजित किया गया, जिसमें बस्तर रेंज के आईजी श्री सुन्दरराज पट्टिलिंगम, सीआरपीएफ दंतेवाड़ा रेंज के डीआईजी श्री राकेश चौधरी, पुलिस अधीक्षक श्री गौरव राय, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री रामकुमार बर्मन तथा विभिन्न सीआरपीएफ बटालियनों के कमांडेंट उपस्थित रहे।
प्रमुख आत्मसमर्पित कैडरों के नाम (कुछ उदाहरण):पाकलू उर्फ प्रदीप ओयाम (डीवीसीएम/कालाहांडी एरिया कमेटी सचिव, 8 लाख इनामी)मोहन उर्फ संजय उर्फ आजाद कड़ती (डीवीसीएम/पश्चिम बस्तर डिवीजन छात्र संगठन अध्यक्ष, 8 लाख इनामी)सुमित्रा उर्फ द्रोपती चापा (भैरमगढ़ एरिया कमेटी सचिव, 8 लाख इनामी)
हुंगी उर्फ अंकिता उर्फ राधिका लेकाम (पीपीसीएम, कंपनी नंबर 10, 8 लाख इनामी)
इन माओवादियों की हिंसक गतिविधियांये कैडर विभिन्न गंभीर घटनाओं में शामिल रहे, जिनमें:पुलिस मुठभेड़ें (2019, 2020, 2022, 2025 आदि)
एम्बुश, आईईडी विस्फोट आगजनी (वाहनों और संपत्ति की)
सलवा जुडूम कार्यकर्ताओं की हत्यारेलवे पटरी उखाड़ना जैसी घटनाएं शामिल हैं।
पुनर्वास की व्यवस्था
सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत प्रत्येक आत्मसमर्पित माओवादी को तत्काल 50 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। इसके अलावा कौशल विकास प्रशिक्षण, कृषि भूमि, आजीविका सहायता और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
व्यापक संदर्भ में सफलता
पिछले 22 महीनों में दंतेवाड़ा जिले में ही 201 इनामी सहित 572+ माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं। ‘लोन वर्राटू’ (घर वापसी) अभियान के तहत अब तक 369 इनामी सहित 1224 माओवादी सरेंडर कर चुके हैं (जिसमें 962 पुरुष और 262 महिलाएं शामिल)।बस्तर रेंज आईजी सुन्दरराज पट्टिलिंगम ने कहा कि ‘‘पूना मारगेम’’ बस्तर में स्थायी शांति, गरिमा और समग्र प्रगति की दिशा में एक परिवर्तनकारी पहल साबित हो रही है।
छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। यह सामूहिक आत्मसमर्पण इसी दिशा में एक मजबूत कदम है।संदेश: हिंसा का रास्ता छोड़िए, शांति और विकास की राह अपनाइए। हर किसी के लिए मुख्यधारा में लौटने का अवसर उपलब्ध है। बस्तर अब बदलाव की नई शुरुआत कर रहा है!
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