विशेष पिछड़ी जनजाति के अनाथ बच्चों को प्रशासनिक मदद की आस

विशेष पिछड़ी जनजाति के अनाथ बच्चों को प्रशासनिक मदद की आस

छुरा : गरियाबंद जिले के विकासखंड छुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत मुढ़ीपानी के कमार पारा में विशेष पिछड़ी जनजाति के अनाथ बच्चों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। यहां विशेष पिछड़ी कमार जनजाति की तीन सगी बहनें माता-पिता के निधन के बाद अभावों में जीवन यापन करने को मजबूर हैं और उन्हें प्रशासनिक सहायता की सख्त आवश्यकता है।जानकारी के अनुसार, तीनों बहनों में सबसे बड़ी गीता (उम्र लगभग 13 वर्ष) पढ़ाई की उम्र में आजीविका की तलाश में रायपुर में काम करने को मजबूर है। वहीं दूसरी बहन कुमारी मधु (लगभग 10 वर्ष) और सबसे छोटी कुमारी रीधी (लगभग 7 वर्ष) गांव के स्कूल में पढ़ाई करने के साथ-साथ घरेलू व अन्य छोटे-मोटे काम कर अपना जीवन चला रही हैं। दुर्भाग्यवश, दोनों छोटी बहनों का अब तक आधार कार्ड भी नहीं बन पाया है, जिससे उन्हें शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

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तीनों बहनों के माता-पिता का पहले ही स्वर्गवास हो चुका है और परिवार में कोई स्थायी सहारा नहीं बचा है। वर्तमान में ये बालिकाएं किसी तरह अपना और एक-दूसरे का सहारा बनकर जीवन यापन कर रही हैं। हालांकि कुछ समाजसेवी आगे आकर उनकी मदद करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन यह सहायता स्थायी नहीं है और सरकारी संरक्षण के बिना भविष्य सुरक्षित नहीं दिख रहा।
इसी ग्राम पंचायत मुढ़ीपानी में विशेष पिछड़ी भुंजिया जनजाति से ताल्लुक रखने वाले बिसनाथ भुंजिया की स्थिति भी कम दयनीय नहीं है। बचपन में ही माता-पिता के निधन के बाद वे अनाथ हो गए थे। कुछ समय तक परिजनों ने उनका पालन-पोषण किया, लेकिन वर्तमान में वे मजदूरी कर किसी तरह अपना जीवन यापन कर रहे हैं। बिसनाथ भुंजिया भी प्रशासनिक सहायता और सरकारी योजनाओं के लाभ की आस लगाए हुए हैं।

स्थानीय लोगों और समाजसेवियों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते इन विशेष पिछड़ी जनजाति के अनाथ बच्चों और युवाओं पर ध्यान दे, तो उन्हें शिक्षा, आवास, राशन, आधार कार्ड, छात्रवृत्ति और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सकता है। इससे न केवल उनका वर्तमान सुधरेगा, बल्कि भविष्य भी सुरक्षित हो सकेगा।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और आदिवासी कल्याण विभाग से मांग की है कि इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सर्वे कर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि विशेष पिछड़ी जनजाति के अनाथ बच्चों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिल सके।










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