ठंड का मौसम पालक की खेती के लिए सबसे बेहतर माना जाता है, क्योंकि इस दौरान तापमान अनुकूल रहने से पौधों की बढ़वार तेजी से होती है. अगर सही समय पर बुवाई की जाए, खेत की अच्छी तैयारी हो और उन्नत किस्म के बीजों का इस्तेमाल किया जाए, तो पालक की पैदावार में जबरदस्त बढ़ोतरी हो सकती है. हल्की सिंचाई, समय-समय पर निराई-गुड़ाई और सही देखभाल से पत्तियां हरी, कोमल और स्वादिष्ट रहती हैं. यही वजह है कि समय पर कटाई कर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन लेकर ठंड के मौसम में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
ठंड के मौसम में पालक की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से जनवरी तक माना जाता है. इस दौरान तापमान अनुकूल रहने के कारण पौधे तेजी से बढ़ते हैं और पत्तियां हरी, कोमल और स्वादिष्ट होती हैं. सही समय पर बुवाई करने से किसान को बाजार में अच्छी कीमत मिलती है और मुनाफा भी अधिक होता है.
ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी -पक्ष -विपक्ष मस्त,छत्तीसगढ़िया पस्त है
पालक की खेती के लिए खेत की गहरी जुताई करना बेहद जरूरी है. मिट्टी भुरभुरी और समतल होनी चाहिए. गोबर की सड़ी खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिलाने से उत्पादन में वृद्धि होती है. अच्छी मिट्टी में उगाई गई पालक लंबे समय तक ताजी रहती है, जिससे किसान को बेहतर आमदनी मिलती है.
ठंड में पालक की अच्छी पैदावार के लिए उन्नत किस्म के बीज का चयन करना जरूरी है. अच्छी किस्म के बीज से रोग कम लगते हैं और पत्तियां मोटी व हरी होती हैं. इससे बाजार में पालक की मांग बढ़ती है और किसान कम लागत में अधिक उत्पादन लेकर अच्छा मुनाफा कमा सकता है.
ठंड में पालक को अधिक पानी की जरूरत नहीं होती, लेकिन समय-समय पर हल्की सिंचाई करना जरूरी है. खेत में खरपतवार न पनपने दें. निराई-गुड़ाई करने से पौधे तेजी से बढ़ते हैं. सही देखभाल से पालक की गुणवत्ता बेहतर होती है और बाजार में इसे अच्छी कीमत मिलती है.
पालक की कटाई बुवाई के लगभग 25 से 30 दिन बाद की जा सकती है. समय पर कटाई करने से नई पत्तियां जल्दी निकल आती हैं और पौधा दोबारा तेजी से बढ़ता है. एक ही खेत से कई बार कटाई संभव होने के कारण उत्पादन बढ़ जाता है. इससे कम समय में अधिक पैदावार मिलती है और किसान ठंड के मौसम में अच्छा मुनाफा कमा सकता है.
.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)

Comments