बलरामपुर : लगातार विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा बलरामपुर तहसील कार्यालय एक बार फिर शर्मनाक वजहों से सुर्खियों में है। इस बार मामला सिर्फ आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि रिश्वत लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र की साख कटघरे में खड़ी हो गई है।
सरकारी फीस 10, बाबू की मांग 500!
टांगरमहरी निवासी दीपक यादव ने अधिकार अभिलेख सेटलमेंट जैसे आवश्यक दस्तावेज के लिए लोक सेवा केंद्र में नियमानुसार आवेदन किया। तय सरकारी शुल्क जमा कर वह निर्धारित तिथि पर तहसील कार्यालय पहुंचा, लेकिन दस्तावेज लेने पहुंचते ही असली खेल सामने आ गया।
आरोप है कि तहसील में पदस्थ बाबू शिवनंदन पैकरा ने दस्तावेज देने के एवज में 500 रुपये की अवैध मांग कर दी। युवक के इनकार करते ही उसका काम रोक दिया गया।
धरने पर बैठा पीड़ित, बोला—‘500 रेट फिक्स
भ्रष्टाचार से आहत दीपक यादव ने शुक्रवार को तहसील कार्यालय के सामने धरना देकर प्रशासन को सीधी चुनौती दे दी। उसका कहना है कि तहसील कार्यालय में नकल और दस्तावेजों के लिए 500 रुपये की ‘रेट फिक्स’ है, जिसके पुख्ता सबूत वीडियो के रूप में उसके पास मौजूद हैं।पीड़ित ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा—सरकारी फीस 10 रुपये है, लेकिन काम कराने के लिए 500 चाहिए। मेरे पास 200 ही हैं, बाकी 300 भीख मांगकर दूं, तभी काम होगा।”
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चौकीदार का बेटा रिश्वत लेते कैमरे में कैद
मामला यहीं नहीं रुका। तहसील कार्यालय में पदस्थ चौकीदार के बेटे द्वारा खुलेआम पैसे वसूलने का वीडियो भी वायरल हो गया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि नकल दस्तावेज वितरण स्थल पर खड़ा युवक, दस्तावेज देने के बदले पैसे ले रहा है और खुलेआम सौदेबाजी कर रहा है।
कर्मचारी कौन, रिश्तेदार कौन— खबर नहीं?
सूत्रों के मुताबिक, तहसील में पदस्थ चौकीदार अक्सर बीमार रहता है और उसकी जगह उसका बेटा नियमित रूप से ड्यूटी करता है। हैरानी की बात यह है कि तहसीलदार और नायब तहसीलदार को यह तक स्पष्ट नहीं कि कार्यालय में वास्तविक कर्मचारी कौन है और कौन किसी कर्मचारी का रिश्तेदार। सवाल उठता है कि जब जिम्मेदार अधिकारी ही आंख मूंदे बैठे हों, तो भ्रष्टाचार को कौन रोकेगा?
‘ऊपर तक जाता है पैसा’—रिश्वत कांड में नया खुलासा
पीड़ित का दावा है कि जब उसने रिश्वत की वजह पूछी, तो जवाब मिला कि यह रकम तहसीलदार और नायब तहसीलदार के नाम पर सब्जी-भाजी और अन्य खर्चों के लिए ली जा रही है। इस बयान में कितनी सच्चाई है, यह जांच का विषय है, लेकिन इस दावे ने पूरे राजस्व तंत्र को संदेह के घेरे में ला दिया है।
फर्जी चौकीदार की असल कहानी
विशेष सूत्रों से सामने आया है कि एक व्यक्ति अपने पिता की चौकीदार वर्दी पहनकर तहसील कार्यालय में नियमित रूप से काम कर रहा है। न सिर्फ उससे काम लिया जा रहा है, बल्कि उसे कार्यालयीन व्यवस्था का हिस्सा भी बना दिया गया है।
सूत्रों का दावा है कि इसी फर्जी चौकीदार के जरिए आम लोगों से अवैध वसूली कराई जा रही है। जब इस पर सवाल उठे, तो उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि ऊपर बैठे लोगों के लिए नियमित रूप से पैसा देना पड़ता है।
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अब सवाल प्रशासन से
वायरल वीडियो, धरना और गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। सवाल यह है कि क्या यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह दबा दिया जाएगा, या फिर दोषियों पर वास्तविक कार्रवाई होगी?
बलरामपुर तहसील में उजागर हुई यह कहानी सिर्फ एक कार्यालय की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की है, जहां सुशासन के दावे और जमीनी हकीकत के बीच गहरी खाई साफ नजर आ रही है।
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