रायगढ़ : राज्य के सबसे बड़े भू-अर्जन घोटाले में खुलासा होने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं करने की वजह से अब राजस्व अधिकारियों के आदेश अदालत में नहीं टिक पा रहे हैं। समय पर विधिवत कार्रवाई होती तो अब तक सभी जिम्मेदार जेल में होते। सरकार के करोड़ों रुपए भी बचते। बजरमुड़ा निवासी एक प्रभावित की याचिका पर हाईकोर्ट ने एसडीएम के एक आदेश को खारिज कर दिया और पुन: प्रक्रिया प्रारंभ करने को कहा है। छग स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी को आवंटित कोल ब्लॉक गारे पेलमा सेक्टर 3 के भू-अर्जन में हुआ घोटाला अब तक का सबसे बड़ा स्कैम है। इसमें तत्कालीन एसडीएम अशोक कुमार मार्बल सस्पेंड हो चुके हैं। ईओडब्ल्यू कार्रवाई कर रही है लेकिन जांच पूरी नहीं हो सकी है। असिंचित भूमि को सिंचित बताकर, पेड़ों की संख्या ज्यादा दिखाकर, टिन शेड को पक्का निर्माण बताकर, बरामदे, कुएं, पोल्ट्री फार्म आदि का मनमानी मुआवजा आकलन किया गया।
परिसंपत्तियों के आकलन में ज्यादा गड़बड़ी की गई। घोटाला उजागर होने केे बाद गांव का दोबारा सर्वे करने का आदेश दिया गया था। पुन: सर्वे के बाद नए सिर से मुआवजा आकलन किया गया, लेकिन बजरमुड़ा निवासी सुरेश चौधरी ने इसके विरुद्ध हाईकोर्ट में अपील की। एसडीएम अशोक मार्बल ने 22 जनवरी 2021 को मुआवजा देने संबंधी आदेश दिया था। नए सिरे से गणना के बाद तत्कालीन एसडीएम ने 2 दिसंबर 2024 को नया आदेश पारित किया। सुरेश चौधरी ने अदालत से मांग की थी कि 2 दिसंबर 2024 के आदेश को खारिज किया जाए। दरअसल वास्तविक क्षेत्रफल से अधिक का मुआवजा तैयार किया गया था। दोबारा सर्वे में गलती पकड़ी गई और सुधारी गई। इससे मुआवजा कम हो गया। अदालत में दलील दी गई कि सही प्रक्रिया का पालन किए बिना ही पुराना आदेश निरस्त किया गया। भू-राजस्व संहिता की धाराओं के तहत आवेदक ने राहत मांगी थी। अदालत ने 2 दिसंबर 2024 के आदेश को खारिज करने का आदेश दिया। साथ ही छग शासन, कलेक्टर और एसडीएम को अपने ही आदेश का रिव्यू करने का अवसर भी दिया है।
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अदालत ने कहा कि 2 दिसंबर 2024 को जारी एसडीएम का आदेश इसलिए निरस्त किया जाता है क्योंकि इसमें भू-राजस्व संहिता की धारा 51 का पालन नहीं किया गया था। एसडीएम को अपने उच्चाधिकारी से अनुमति लेनी चाहिए थी। इसके साथ ही याचिकाकर्ता को जवाब देने का अवसर भी देना था। बताया जा रहा है कि केस के दौरान सुनवाई में आवेदक सुरेश चौधरी को मौका दिया गया था। हालांकि अदालत ने प्रशासन को विधि अनुसार कार्यवाही करने का अवसर भी दिया है।
जितनी देरी, उतने मिलेंगे मौके
रायगढ़ जिले का बजरमुड़ा भूअर्जन घोटाला प्रदेश का सबसे बड़ा घोटाला है। सरकारी कंपनी सीएसपीजीसीएल को सुनियोजित तरीके से नुकसान पहुंचाया गया। मिलूपारा, करवाही, खम्हरिया, ढोलनारा और बजरमुड़ा में 449.166 हे. पर लीज स्वीकृत की गई। इसमें लीज क्षेत्र के अंतर्गत 362.719 हे. और बाहर 38.623 हे. भूमि पर सरफेस राइट के तहत भूअर्जन किया गया। जुलाई 2020 को प्रारंभिक सूचना प्रकाशित की गई। 22 जनवरी 2021 को अवार्ड पारित किया गया। इसमें केवल बजरमुड़ा के 170 हे. भूमि पर 415.69 करोड़ मुआवजा दिया गया। राज्य स्तरीय टीम की जांच में घपला प्रमाणित हुआ जिसके बाद दोषियों के विरुद्ध अपराध दर्ज करने का आदेश दिया गया था। सरकार ने प्रकरण एसीबी-ईओडब्ल्यू को भेजा है। तत्कालीन एसडीएम अशोक मार्बल, तत्कालीन तहसीलदार बंदेराम भगत, आरआई मूलचंद कुर्रे, वरिष्ठ उद्यानिकी अधिकारी संजय भगत, पीएचई के दो सहायक अभियंता देवप्रकाश वर्मा व आरके टंडन, पीडब्ल्यूडी एसडीओ केपी राठौर, सब इंजीनियर धर्मेंद्र त्रिपाठी, तहसीलदार टीआर कश्यप, चितराम राठिया वन परिक्षेत्र अधिकारी तमनार, बीटगार्ड रामसेवक महंत और बलराम प्रसाद पडि़हारी परिक्षेत्र सहायक पर आरोप हैं।
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