जनवरी महीने में इस बार कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने रबी फसलों की चिंता बढ़ा दी है. लगातार गिरते तापमान और सुबह-शाम की ठिठुरन का असर खेतों में साफ दिखाई देने लगा है. मौसम की इसी गंभीरता को देखते हुए देवघर कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक ने किसानों के लिए अगले दो सप्ताह की खेती से जुड़ी अहम सलाह दी है, ताकि फसलों को नुकसान से बचाया जा सके और उत्पादन प्रभावित न हो.
कृषि वैज्ञानिक साओन चक्रवर्ति ने लोकल 18 के संवाददाता से बात चित करते हुए कहाँ की जनवरी की इस तेज ठंड में अगेती खेती की शुरुआत फिलहाल टालना ही बेहतर है. जो किसान अगेती सब्जी या अन्य फसलों की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें सलाह दी गई है कि वे थोड़ी प्रतीक्षा करें और फरवरी महीने में ही अगेती खेती की शुरुआत करें.इससे ठंड और पाले से होने वाले नुकसान से बचा जा सकेगा.
रबी फसल मे रखे यह ध्यान
रबी फसल मे गेहूं की गिनती आती है.गेहूं की बात करें तो अब केवल बहुत देर से बोई जाने वाली किस्मों की बुवाई का ही समय बचा है. किसान 15 जनवरी तक ही गेहूं की बुवाई पूरी कर लें और वही किस्में बोएं जो उनके क्षेत्र के लिए सही हो.जिन खेतों में गेहूं की बुवाई पहले ही हो चुकी है, वहां 20 से 25 दिन के अंतर पर जरूरत के अनुसार सिंचाई जरूर करते रहें.इसके साथ ही समय समय पर पोटाश का छिड़काव करते रहे.ध्यान रखें कि अत्यधिक पानी देने से ठंड में फसल को नुकसान भी हो सकता है.
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आलू और मटर की फसल मे रखे यह ध्यान
आलू की फसल में इस मौसम में पछेती झुलसा रोग का खतरा सबसे ज्यादा रहता है. इसलिए किसानों को अपने खेतों पर लगातार नजर रखने की जरूरत है. बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखते ही फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव करें. जहां रोग का असर अधिक हो, वहां 15-15 दिन के अंतर पर दवा का छिड़काव करना जरूरी बताया गया है.मटर की फसल में फूल आने का समय बेहद संवेदनशील होता है। इस दौरान एक सिंचाई अवश्य करें. कोहरा और अधिक नमी के कारण मटर में सफेद चूर्ण रोग और डाउनी मिल्ड्यू का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए समय रहते दवा का छिड़काव करें. फलियां बनते समय दूसरी हल्की सिंचाई करने से उत्पादन बेहतर होता है.
टमाटर मे रखे यह ध्यान
टमाटर और मिर्च की फसलों को झुलसा रोग से बचाने के लिए फफूंदनाशक दवाओं का प्रयोग करें. साथ ही कीटों से बचाव के लिए नीम आधारित या जैविक कीटनाशक का उपयोग करना लाभकारी रहेगा. आम के बागों में अच्छी बौर पाने के लिए सूक्ष्म पोषक तत्वों का घोल बनाकर छिड़काव करें, इससे मंजर मजबूत निकलते हैं और फलन बढ़ता है.इस समय ठंड और पाले से बचाव सबसे जरूरी है, खासकर नए लगाए गए पौधों और एक-दो साल पुराने बागों के लिए. ऐसे पौधों को घास, पुआल या फूस से ढक दें और खेत में हल्की नमी बनाए रखें.इससे पाले का असर कम होगा और फसल सुरक्षित रहे.

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