अध्यात्म और आधुनिकता का मेल आज की पीढ़ी के लिए बहुत जरूरी ---तेजस्वी यदु

राष्ट्र की प्रगति,युवाओं की सोच और उनकी कार्यक्षमता पर निर्भर करती है ----आर आर कुर्रे
छुरा :- किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके युवाओं की सोच और उनकी कार्यक्षमता पर निर्भर करती है राष्ट्रीय सेवा योजना के प्रेरणा पुरुष व युवाओं के प्रेरणाश्रोत रहे , स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस पर रासेयो कार्यक्रम अधिकारी रेखराम कुर्रे ने कचना घुरवा महाविद्यालय में छात्र छात्राओं को संबोधित करते हुए उक्त बाते कहे।उन्होंने आगे बताया कि युवाओं को देश का भविष्य कहा जाता है। किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके युवाओं की सोच और उनकी कार्यक्षमता पर निर्भर करती है। स्वामी विवेकानंद युवाओं के सबसे बड़े प्रेरणास्रोत रहे हैं। उनका मानना था कि युवा शक्ति ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।

महाविद्यालय के प्राध्यापक व पुर्व स्वयं सेवक विनोद यादव ने बताया कि राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने की शुरुआत 1984 में हुई थी। भारत सरकार ने महसूस किया कि स्वामी विवेकानंद का दर्शन और उनके आदर्श भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत हो सकते हैं। इसलिए साल 1984 में भारत सरकार द्वारा स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाये जाने का निर्णय लिया , और राष्ट्रीय युवा दिवस का सबसे पहला आयोजन 12 जनवरी 1985 को किया गया।
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सह कार्यक्रम अधिकारी व सांस्कृतिक प्रभारी निर्मला यादव ने बताई कि स्वामी विवेकानंद ने 1893 में शिकागो के विश्व धर्म संसद में भारत और अध्यात्म का परचम लहराया था। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने 19वीं सदी में थे।वही क्रीड़ा अधिकारी प्राध्यापक तरुण निर्मलकर ने कहा कि हर साल इस दिवस को एक खास थीम के साथ मनाया जाता है, जो वर्तमान समय की चुनौतियों और युवाओं की भूमिका को दर्शाता है।वर्ष 2026 के लिए इस दिवस की थीम युवाओं की शिक्षा और रोजगार पर आधारित है। यह थीम युवाओं के नवाचार और कौशल को विकसित करने पर जोर दे रहा है, ताकि भारत एक विकसित देश बन सके।
महाविद्यालय प्रबंध समिति सदस्य तेजस्वी यादव ने स्वयं सेवकों से कहा आज के संदर्भ में स्वामी विवेकानंद का विचार,अध्यात्म और आधुनिकता का मेल , आज की पीढ़ी के लिए बहुत जरूरी है। वे कहते थे कि युवाओं के पास "लोहे की मांसपेशियां और फौलाद की नसें" होनी चाहिए़ उन्होंने कहा कि स्वयं पर विश्वास करना ही सफलता की पहली सीढ़ी है। अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित होना।
अच्छे चरित्र व सेवा भावना से- दूसरों की मदद करना ही वास्तविक जीवन है। इस दौरान महाविद्यालय के प्राध्यापक पी.के. यादव, कैलाश साहू, सुश्री आरती साहू, देवेंद्र भारती, धनराज ध्रुव, तिलेश्वरी साहू, दुमेश्वर यदु, टिकेश निर्मलकर सहित सभी संकायों व रासेयो स्वयं सेवक छात्र - छात्राएं बड़ी संख्या में सम्मिलित होकर विभिन्न गतिविधियों में भाग लिए।

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