23 जनवरी को पत्रकार फिर उठाएंगे आवाज,साक्ष्य गायब, सवाल कायम
परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद / छुरा : गरियाबंद जिले के छुरा नगर के वरिष्ट पत्रकार स्वर्गीय उमेश राजपूत की निर्मम हत्या को पंद्रह वर्ष बीत जाने के बावजूद आज तक न्याय नहीं मिल पाया है। इसी कड़ी में आगामी 23 जनवरी को एक बार फिर स्व. पत्रकार उमेश राजपूत श्रद्धांजलि दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर पत्रकारों और परिजनों द्वारा न्याय की मांग को लेकर एकजुट होकर आवाज बुलंद की जाएगी। गौरतलब है कि छुरा निवासी पत्रकार उमेश राजपूत की उनके ही निवास पर23 जनवरी 2011 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना न केवल क्षेत्र बल्कि पूरे प्रदेश की पत्रकारिता जगत को झकझोर देने वाली थी। हत्या के बाद शुरुआती लगभग चार वर्षों तक मामले की जांच स्थानीय पुलिस द्वारा की गई, लेकिन अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। जांच की धीमी गति और ठोस परिणाम सामने न आने से आहत परिजनों ने अंततः उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और मामले की सीबीआई जांच की मांग की।
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हाईकोर्ट के निर्देश के बाद यह प्रकरण पिछले लगभग दस वर्षों से सीबीआई के पास लंबित है, लेकिन दुर्भाग्यवश आज तक न तो हत्यारे सामने आए और न ही पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाया। सीबीआई जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि स्थानीय पुलिस थाने से इस हत्याकांड से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य गायब हो चुके हैं, जिससे जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए।पंद्रह वर्षों से लगातार न्याय की मांग करते आ रहे पत्रकार संगठन और स्व. उमेश राजपूत के परिजन आज भी उम्मीद का दामन थामे हुए हैं।
श्रद्धांजलि दिवस के अवसर पर पत्रकार समुदाय द्वारा एक बार फिर यह संदेश दिया जाएगा कि जब तक स्व. उमेश राजपूत को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।पत्रकारों का कहना है कि यह मामला केवल एक पत्रकार की हत्या का नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। यदि ऐसे मामलों में न्याय नहीं मिलता, तो यह पूरे समाज के लिए चिंताजनक है। श्रद्धांजलि दिवस के माध्यम से शासन-प्रशासन और न्यायपालिका का ध्यान एक बार फिर इस लंबित प्रकरण की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया जाएगा।स्व. उमेश राजपूत की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और परिजन शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और न्याय की मांग को दोहराएंगे।

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