षटतिला एकादशी का व्रत आज,इस तरह करें प्रभु श्रीहरि को प्रसन्न

षटतिला एकादशी का व्रत आज,इस तरह करें प्रभु श्रीहरि को प्रसन्न

षटतिला एकादशी का व्रत माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर किया जाता है। इस बार मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का संयोग भी बन रहा है, जो बहुत ही शुभ माना जा रहा है। ऐसे में यह दिन प्रभु श्रीहरि की कृपा के साथ-साथ सूर्य देव की कृपा प्राप्ति के लिए भी उत्तम रहने वाला है। इस दिन पर विशेष पूजा-अर्चना द्वारा आप प्रभु श्रीहरि की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी -पक्ष -विपक्ष मस्त,छत्तीसगढ़िया पस्त है 

षटतिला एकादशी पूजा विधि

  1. एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर पानी में तिल मिलाकर स्नान करें।
  2. साफ-सुथरे पीले वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
  3. घर के मंदिर में या पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें।
  4. एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  5. भगवान विष्णु को गंगाजल से स्नान कराएं और पीले फूल, धूप, दीप और गंध अर्पित करें।
  6. इस दिन भगवान विष्णु को भोग के रूप में तिल के लड्डू या तिल से बनी मिठाई चढ़ाएं।
  7. भोग में विष्णु जी को तुलसी दल जरूर अर्पित करें।
  8. षटतिला एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें।
  9. अंत में सभी लोगों में प्रसाद बांटें।

भगवान विष्णु के मंत्र

1. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

विष्णु भगवते वासुदेवाय मन्त्र
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥

3. ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

4. शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्
विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥

भगवान विष्णु की आरती 

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे

भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

ॐ जय जगदीश हरे...

जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।

स्वामी दुःख विनसे मन का।

सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

ॐ जय जगदीश हरे...

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।

स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।

तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥

ॐ जय जगदीश हरे...

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।

स्वामी तुम अन्तर्यामी।

पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥

ॐ जय जगदीश हरे...

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।

स्वामी तुम पालन-कर्ता।

मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥

ॐ जय जगदीश हरे...

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।

स्वामी सबके प्राणपति।

किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥

ॐ जय जगदीश हरे...

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

स्वामी तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे॥

ॐ जय जगदीश हरे...

विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा।

स्वामी पाप हरो देवा।

श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, संतन की सेवा॥

ॐ जय जगदीश हरे...

श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।

स्वामी जो कोई नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥

ॐ जय जगदीश हरे...







You can share this post!


Click the button below to join us / हमसे जुड़ने के लिए नीचें दिए लिंक को क्लीक करे


Related News



Comments

  • No Comments...

Leave Comments