मनेंद्रगढ़ (MCB) : जिले में धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। धान उपार्जन केंद्रों में पुराने धानों की खरीदी की जा रही है, वहीं दूसरी ओर किसानों को बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि कई खरीदी केंद्रों पर किसानों को स्वयं ही धान की बोरियां भरनी पड़ रही हैं और छल्ली (सिलाई) लगाने का काम भी अपने हाथों से करना पड़ रहा है।सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरे काम के लिए किसानों को किसी प्रकार की मजदूरी नहीं दी जा रही है। मजदूरों की अनुपलब्धता का हवाला देकर समितियों द्वारा यह जिम्मेदारी सीधे किसानों पर डाल दी गई है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
किसानों का कहना है कि शासन द्वारा धान खरीदी के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं, जिनमें तौल, भराई और छल्ली लगाने की जिम्मेदारी समिति और नियुक्त मजदूरों की होती है। बावजूद इसके किसान घंटों लाइन में लगने के बाद शारीरिक श्रम करने को मजबूर हैं। इससे न केवल उनका समय खराब हो रहा है बल्कि आर्थिक और मानसिक परेशानी भी बढ़ रही है।इस मामले को लेकर किसानों द्वारा जिला प्रशासन और जिला खाद्य अधिकारी से शिकायत भी की गई। शिकायत के बाद जिला खाद्य अधिकारी द्वारा कुछ उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण किया गया, लेकिन यह कार्रवाई केवल औपचारिकता तक ही सीमित नजर आई।
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किसानों का आरोप है कि मौके पर पहुंचकर अधिकारियों ने अस्थायी तौर पर व्यवस्थाएं दिखाकर मामला शांत करने की कोशिश की, जबकि जमीनी हकीकत में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। किसानों का कहना है कि निरीक्षण के समय कुछ मजदूरों को दिखाया गया, लेकिन अधिकारियों के जाते ही वही पुरानी स्थिति लौट आई। इसे किसान “खानापूर्ति की कार्रवाई” बता रहे हैं।स्थानीय किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही धान खरीदी केंद्रों पर मजदूरों की नियमित व्यवस्था नहीं की गई और किसानों से जबरन काम लेना बंद नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन किसानों की परेशानी को गंभीरता से लेकर स्थायी समाधान करेगा, या फिर कागजी निरीक्षण और दिखावटी कार्रवाई से ही काम चलाया जाता रहेगा। धान खरीदी जैसे संवेदनशील मुद्दे में ऐसी लापरवाही किसानों के विश्वास को तोड़ने का काम कर रही है।

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