मौनी अमावस्या कब हैं? यहां नोट करें सही तिथि और शुभ मुहूर्त

मौनी अमावस्या कब हैं? यहां नोट करें सही तिथि और शुभ मुहूर्त

 सनातन धर्म में मौनी अमावस्या का खास महत्व है। यह दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर गंगा स्नान कर भगवान शिव और विष्णु जी की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। मौनी अमावस्या के दिन मौन साधना की जाती है।

इसके साथ ही आर्थिक स्थिति अनुसार दान-पुण्य किया जाता है। इस साल शुक्रवार 16 जनवरी को मासिक शिवरात्रि है। यह पर्व हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इसके अगले दिन अमावस्या मनाई जाती है। इसके लिए लोगों के मन में दुविधा है कि माघ अमावस्या 17 या 18 जनवरी किस दिन मनाई जाएगी? आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं-

माघ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, गुरुवार 15 जनवरी को रात 08 बजकर 17 मिनट से माघ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि शुरू होगी। वहीं, त्रयोदशी तिथि का समापन 16 जनवरी को रात 10 बजकर 21 मिनट पर होगा। त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष काल में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। इसके लिए 16 जनवरी को प्रदोष व्रत मनाया जाएगा।

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माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, शुक्रवार 16 जनवरी को रात 10 बजकर 21 मिनट से माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि शुरू होगी। वहीं, चतुर्दशी तिथि का समापन 18 जनवरी को रात 12 बजकर 03 मिनट पर होगा। हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। वहीं, मासिक शिवरात्रि को निशा काल में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। इसके लिए 16 जनवरी को ही मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी। इसके बाद अमावस्या तिथि शुरू होगी।

कब मनाएं मौनी अमावस्या?
ज्योतिषियों की मानें तो शनिवार 17 जनवरी को चतुर्दशी तिथि है, जिसका समापन अंग्रेजी कैलेंडर से 18 जनवरी को देर रात 12 बजकर 03 मिनट पर होगा। इसके लिए 17 जनवरी को रिक्ता होगा। वहीं, उदया तिथि से मौनी अमावस्या रविवार 18 जनवरी को मानना श्रेष्ठकर होगा।

मौनी शुभ योग

ज्योतिषियों की मानें तो मौनी अमावस्या पर हर्षण और सर्वार्थ सिद्धि योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इसके साथ ही शिववास योग का भी निर्माण हो रहा है। इन योग में पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होगी। वहीं, साधक पर पितरों की कृपा बरसेगी।










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