बिलासपुर : सरकारी कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जो प्रशासनिक मनमानी पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। अदालत ने दो टूक कहा है कि किसी भी कर्मचारी को सुने बिना उसकी वार्षिक गोपनीय चरित्रावली (ACR) में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज नहीं की जा सकती। ऐसा करना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि कर्मचारी के करियर के साथ अन्याय भी है।
ACR के नाम पर प्रमोशन रोका गया
मामला जांजगीर-चाम्पा जिले में पदस्थ आबकारी मुख्य आरक्षक मुकेश शर्मा से जुड़ा है। वर्ष 2023 में आबकारी उपनिरीक्षक पद के लिए आयोजित विभागीय परीक्षा में मुकेश शर्मा ने 200 में से 172 अंक अर्जित किए थे। चयन सूची में अंतिम रूप से चुने गए उम्मीदवारों से उनका अंतर बेहद मामूली था, लेकिन वर्ष 2017, 2018 और 2019 की ACR में दर्ज प्रतिकूल टिप्पणियों के आधार पर उनके अंकों में कटौती कर दी गई और प्रमोशन से वंचित कर दिया गया।
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याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जिन वर्षों की ACR को आधार बनाकर नुकसान पहुंचाया गया, उनमें न तो कभी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और न ही किसी प्रकार की सुनवाई का अवसर दिया गया। इसके बावजूद उन टिप्पणियों को वैध मानकर प्रमोशन रोक दिया गया, जो कानून और न्याय दोनों के विपरीत है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला देते हुए दलील दी कि बिना सूचना और बिना सुनवाई की गई प्रतिकूल प्रविष्टियां स्वतः ही निष्प्रभावी मानी जाती हैं। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ शासन के 2005 के सर्कुलर का भी उल्लेख किया गया, जिसके तहत अनुसूचित जिलों में पदस्थ कर्मचारियों को ACR मूल्यांकन में अतिरिक्त लाभ दिए जाने का प्रावधान है।
हाई कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी
जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकल पीठ ने माना कि शासन के सर्कुलर के अनुसार याचिकाकर्ता अतिरिक्त अंकों का हकदार था और यदि यह लाभ दिया जाता, तो उसका चयन स्वाभाविक रूप से हो जाता। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि प्रशासनिक मूल्यांकन की प्रक्रिया कर्मचारी को अंधेरे में रखकर नहीं चलाई जा सकती।
राज्य शासन को सीधा आदेश
हाई कोर्ट ने राज्य शासन को निर्देश दिया है कि मुकेश शर्मा को आबकारी उपनिरीक्षक के पद पर पदोन्नति प्रदान की जाए। यह फैसला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उन तमाम कर्मचारियों के लिए राहत का संदेश है, जिनका भविष्य ACR की आड़ में प्रभावित किया जाता रहा है।
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