एक वक्त था जब खेती का नाम सुनते ही घाटा, कर्ज और परेशानियां याद आती थीं. लेकिन अब कहानी बदल रही है. अगर फसल सही चुनी जाए और तरीका थोड़ा स्मार्ट हो, तो खेती भी नौकरी से ज्यादा कमाई दे सकती है. इसका जीता-जागता उदाहरण हैं मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के सुरगांव जोशी गांव के युवा किसान राजू पटेल, जो आज बेर (बोर) की खेती से शानदार कमाई कर रहे हैं.
“कलेक्टर” से किसान बनने तक का सफर
राजू पटेल को गांव में लोग प्यार से “कलेक्टर” कहते हैं. वजह ये कि कभी उनका सपना कलेक्टर बनने का था. पढ़ाई भी अच्छी चल रही थी, लेकिन घर की आर्थिक हालत ऐसी नहीं थी कि आगे पढ़ पाते. मजबूरी में पढ़ाई छोड़नी पड़ी और खेती का सहारा लिया. शुरुआत में उन्होंने गेहूं, सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलें उगाईं, लेकिन हर साल घाटा ही हाथ लगा. तब राजू ने ठान लिया कि अब कुछ अलग करना है.
यूट्यूब बना गुरु, बेर बनी किस्मत
राजू ने यूट्यूब और सोशल मीडिया पर खेती से जुड़े वीडियो देखने शुरू किए. तभी उन्हें बेर की खेती के बारे में पता चला. उन्होंने देखा कि अच्छी क्वालिटी के बेर बाजार में कम मिलते हैं और इसकी खेती बहुत कम किसान करते हैं. बस यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया.
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एक एकड़ में 500 पौधे, कम लागत-ज्यादा मुनाफा
राजू ने साउथ इंडिया की दो किस्में लगाईं-मिस इंडिया और बाल सुंदरी. एक एकड़ में करीब 500 पौधे
पौधों की दूरी: 10×10 फीट
एक पौधे से 15–20 किलो बेर
आज हालत ये है कि व्यापारी खुद खेत पर आकर 35 से 40 रुपये किलो के भाव में बेर खरीद रहे हैं. खास बात ये कि इस खेती में खर्च बेहद कम है. सिर्फ एक बार इल्ली की समस्या आती है, जिसे ऑर्गेनिक दवा से आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है.
डेढ़ लाख की कमाई, अभी और बाकी
बाल सुंदरी किस्म का बेर साइज में बड़ा होता है, जबकि मिस इंडिया खाने में ज्यादा मीठा होता है. राजू अब तक डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा के बेर बेच चुके हैं और अभी फसल चल ही रही है. उन्होंने बेर के साथ इंटर क्रॉपिंग भी की है, जिससे एक ही खेत से दो फसलों की कमाई हो रही है.
20 साल तक कमाई, सालाना 4 लाख की उम्मीद
राजू बताते हैं कि बेर के पौधे करीब 20 साल तक फल देते हैं और हर साल पैदावार बढ़ती है. पौधों पर कुल खर्च सिर्फ 20 हजार रुपये आया था, जबकि आने वाले समय में हर साल 4 लाख रुपये तक कमाई का अनुमान है. सही कटिंग और देखभाल हो तो एक पेड़ से एक क्विंटल बेर भी मिल सकता है.
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