हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन जया एकादशी मनाई जाती है। यह पर्व लक्ष्मी नारायण जी को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर भक्ति भाव और विधि-विधान से लक्ष्मी नारायण जी की पूजा की जाती है। साथ ही एकादशी का व्रत रखा जाता है।
धार्मिक मत है कि जया एकादशी का व्रत करने से साधक को अधोगति (निम्न लोक) से मुक्ति मिलती है। साथ ही घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है। इस व्रत को करने से साधक पर लक्ष्मी नारायण जी की कृपा बरसती है। आइए, इस व्रत के बारे में सबकुछ जानते हैं-
जया एकादशी का महत्व
सनातन शास्त्रों में जया एकादशी की महिमा का वर्णन विस्तारपूर्वक किया गया है। इस व्रत को करने से व्यक्ति को प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है। साथ ही साधक के पितरों को जगत के पालनहार भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष मिलती है। इस व्रत को करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। इस व्रत के महत्व के बारे में भगवान कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को दिया था। इस शुभ अवसर पर मंदिरों में लक्ष्मी नारायण जी की विशेष पूजा की जाती है।
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कब है जया एकादशी?
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 28 जनवरी को शाम 04 बजकर 35 मिनट पर होगी। वहीं, शुक्ल पक्ष की एकादशी का समापन 29 जनवरी को दोपहर 01 बजकर 55 मिनट पर होगा। इस प्रकार 29 को जया एकादशी मनाई जाएगी। साधक सुविधा अनुसार समय पर स्नान-ध्यान कर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा कर सकते हैं।
जया एकादशी शुभ योग
जया एकादशी के दिन भद्रावास और रवि योग का संयोग है। रवि योग में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से साधक को आरोग्यता का वरदान मिलेगा। साथ ही करियर और कारोबार को नया आयाम मिलेगा। इस शुभ अवसर पर रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र का संयोग है। इन योग में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी।
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